मिस्टर एम (मुमताज अली खान) की आशा यात्रा में सपा और सरकारी मशीनरी की सक्रियता पर सवाल उठने लगे हैं। कहा जा रहा है कि आपसी प्रेम-भाईचारे और सद्भाव के लिए निकाली जा रही यात्रा वास्तव में सपा का कार्यक्रम बन कर रह गई है और इसीलिए दूसरे सभी दलों ने इससे किनारा कर लिया है।
दूसरी पार्टियों का यह कहना है कि कार्यक्रम को सपा ने हाईजैक कर लिया है। उल्लेखनीय है कि कन्या कुमारी से कश्मीर तक की यात्रा पर निकले मिस्टर एम 12 जनवरी को यहां पैदल यात्रा निकालेंगे। इस यात्रा में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी शामिल होंगे। जिसकी तैयारी जोरों पर चल रही है।
यात्रा के संबंध जब दूसरे दलों के नेताओं से बात की गई तो उन्होंने कहा कि आशा यात्रा तो सपा
यात्रा बनकर रह गई है। आवाज उठने लगी है कि मिस्टर एम कहीं सपा के ब्रांड एम्बेसडर तो नहीं बन गए हैं। ं
छह नवंबर 1949 को साउथ के तिरुवनंतपुरम में एक मुस्लिम परिवार में जन्मे मुमताज अली।
वह युवावस्था में ही योगी हो गए। 19 साल की अवस्था में उन्होंने हिमालय की यात्रा की और कई साधु संन्यासियों से मिले। उनके अनुभव से खुद को समृद्ध किया। वहां वह बाबा महेश्वरनाथ से मिले जिन्होंने उनकी सोच ही बदल दी। बाद में गुरु महेश्वर नाथ ने इनका नाम मधुकर नाथ कर दिया था।
अब वे श्री एम के नाम से मशहूर हैं। वे मानव एकता मिशन के संस्थापक हैं। मिशन की अवधारणा सही समाज निर्माण, आशापूर्ण परिवर्तन और संगठित संसार का निर्माण है। शांति और सद्भाव की यात्रा कन्याकुमारी से कश्मीर तक लगभग सात हजार पांच सौ किमी की पद यात्रा है।
श्री एम के नेतृत्व में यह यात्रा लगभग 18 महीनों में भारत के 11 राज्यों से गुजरेगी। यात्रा का शुभारंभ 12 जनवरी 2015 को कन्या कुमारी के विवेकानंद रॉक मेमोरियल से किया गया था। समापन जम्मू और कश्मीर के श्रीनगर में होगा। इस यात्रा का उद्देश्य सद्भावना के संदेश के करोड़ो देशवासियों तक पहुंचाना है।