पुलिस लाइन में रविवार सुबह मैनपुरी के एक सपा नेता के भाई का खून से लथपथ शव मिलने से हड़कंप मच गया। फौरन पुलिस अफसर और फोरेसिंक टीम, डॉग स्क्वायड मौके पर पहुंचा।
पता चला कि सपा नेता का भाई पत्नी से विवाद के मामले में चल रहे केस की तारीख में दो दिन पहले यहां यहां आया था और एक दोस्त कांस्टेबल के कमरे में रुका था। मृतक के परिजनों ने कोतवाली थाने में कांस्टेबल दोस्त, पत्नी समेत सात लोगों के खिलाफ हत्या की एफआईआर दर्ज कराई है।
पुलिस ने पत्नी, उसकी मां और भाई को पकड़ा है। कोतवाली इंस्पेक्टर हरीराम वर्मा मामले की छानबीन कर रहे हैं। उधर, शाम को पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर मैनपुरी चले गए। पोस्टमार्टम में जितेंद्र के शरीर पर पांच चोटें मिली हैं। पुलिस का कहना है कि बैरक की चौथी मंजिल से गिरने से मौत हुई है।
रविवार सुबह एक कांस्टेबल की सूचना पर पुलिस लाइन के आरआई आशाराम ने एसएसपी शलभ माथुर समेत सभी पुलिस अफसरों को सूचना दी। थोड़ी देर बाद एसपी पूर्वी, समेत तमाम अफसर फोरेंसिक टीम, डॉग स्क्वायड के साथ पुलिस लाइन पहुंचे। इंस्पेक्टर ने बताया कि जांच में पता चला कि मरने वाला जितेंद्र यादव (38) है।
वह मैनपुरी के कुर्रा क्षेत्र लेखराजपुर में रहता था। जितेंद्र के भाई संजीव यादव मैनपुरी जिला कोआपरेटिव संघ के अध्यक्ष हैं। जितेंद्र यादव पुलिस लाइन में मस्जिद वाली बैरक की चौथी मंजिल में रहने वाले कांस्टेबल सुदीप का दोस्त है। वह शनिवार रात सुदीप के कमरे में ही रुका था।
सुदीप के कमरे से उसका बैग और जूते भी मिले हैं। दोपहर में सपा नेता संजीव यादव परिजनों के साथ पुलिस लाइन पहुंचे। उन्होंने बताया कि जितेंद्र की शादी यहां फेथफुलगंज निवासी डाक विभाग कर्मी अशोक यादव की बेटी प्रीति से 2003 में हुई थी। इनके नौ साल की बेटी एंजिल है।
संजीव ने पुलिस को बताया कि प्रीति की ससुराल वालों से नहीं बनती है। करीब चार साल से वह बेटी के साथ मायके में रह रही है। प्रीति ने ससुराल वालों के खिलाफ घरेलू हिंसा और मेंटीनेंस का मामला कोर्ट में दायर कर रखा है। 13 मार्च को कोर्ट में इस मामले की तारीख थी। जितेंद्र 13 तारीख को मैनपुरी से यहां आया था।
तब से उसका पता नहीं था। रविवार सुबह पुलिस से जितेंद्र की मौत की सूचना मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि कांस्टेबल सुदीप और प्रीति में अच्छे रिश्ते हैं। उन्होंने बताया कि 13 तारीख को प्रीति ने उनकी बड़ी बहन को फोन करके कहा था कि हमने जितेंद्र को रोक लिया है। बाद में भेज देंगे। पर, जितेंद्र घर नहीं लौटा।