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मनीष तिवारी बोले, अगले लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस-सपा गठबंधन संभव

Wed, 15 Feb 2017 10:37 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर

सार

-अमर उजाला आमने-सामने में कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीष तिवारी बोले
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कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी अमर उजाला के आमने-सामने कार्यक्रम के मंच से बोलते हुए - फोटो : अमर उजाला, कानपुर
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विस्तार
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कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा है कि सपा-कांग्रेस गठबंधन जनता को बहुत पसंद आया है। 2019 लोकसभा चुनाव में भी यह गठबंधन बना रह सकता है। एलन हाउस ग्रुप ऑफ कॉलेजेज में मंगलवार को अमर उजाला आमने-सामने में उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा सांसद चुनकर देश की संसद में भेजता है। 2017 के विधानसभा चुनाव के नतीजे प्रदेश के साथ-साथ 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव का संकेत भी देंगे।
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सपा का नया नेतृत्व जनता को पसंद
उन्होंने कहा कि 1985 में प्रदेश में आखिरी बार कांग्रेस की सरकार बनी थी। 1989 से लगातार कांग्रेस विपक्ष में है। अब सपा में एक नया नेतृत्व (अखिलेश यादव) उभरा है, जिस पर प्रदेश की जनता विश्वास करती है। इसके मद्देनजर कांग्रेस ने सपा के साथ गठबंधन किया है। यह गठबंधन प्रदेश में अच्छे शासन वाली सरकार देगा। बसपा के राज में भ्रष्टाचार हावी रहा। प्रदेश के लोग उसे भुगत चुके हैं। भौगोलिक रूप से यह बहुत बड़ा प्रदेश है। कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति को भी न्याय मिले, यही नई गठबंधन सरकार की प्राथमिकता होगी।

भाजपा के पास चेहरा नहीं
भाजपा पर हमला बोलते हुए तिवारी ने कहा कि वहां पर स्थानीय नेतृत्व नहीं होता। विधानसभा चुनाव भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर लड़े जा रहे हैं। लगता है कि मोदी गोवा, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश के साथ-साथ शायद मणिपुर के भी मुख्यमंत्री होंगे। यदि विधानसभा चुनाव प्रधानमंत्री के नाम पर हो रहा है तो केंद्र सरकार के कार्यकाल का मूल्यांकन प्रदेश में भी होगा।
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हर मोर्चे पर फेल है सरकार
मनीष तिवारी ने कहा सरकार के कामकाज का आकलन आंतरिक सुरक्षा, कूटनीति, आर्थिक विकास, सांप्रदायिक सौहार्द और विकास से होता है। भाजपा सरकार में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर गिर रही है। भारत-पाक रिश्ते इस कदर बिगड़े हैं कि केंद्र सरकार बैकफुट पर आने को है। सांप्रदायिक सौहार्द के परखच्चे उड़ गए हैं। किरण रिजिजू अटपटे बयान जारी कर रहे हैं। इसके बाद यह मंथन शुरू हुआ कि भाजपा विरोधी सभी पार्टियों को एक मंच पर आना चाहिए। 2004 में गुजरात के बाद पहली बार यूपीए गठबंधन अस्तित्व में आया और 10 वर्षों तक सत्ता में रहा। कांग्रेस-सपा गठबंधन भी इसी तर्ज पर हुआ है।
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