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गठबंधन के ऐलान के बाद यहां पहली बार एक मंच पर नजर आए जो कभी थे 'धुर-विरोधी'

Sun, 13 Jan 2019 06:44 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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मायावती - अखिलेश
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सपा और बसपा में गठबंधन का ऐलान होने के बाद धुर विरोधी लंबे समय के बाद एक मंच पर एक साथ नजर आए। इस दौरान सपा और बसपा के कार्यकर्त्ताओं में गजब का जोश देखते ही बन रहा था। 

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लोकसभा चुनाव के मद्देनजर प्रदेश में सपा-बसपा का गठबंधन होने से दोनों दलों के कार्यकर्ताओं में उत्साह है। रविवार को दोनों दलों के जिलाध्यक्षों ने प्रेसवार्ता कर कहा कि यह गठबंधन केंद्र की तानाशाह सरकार को उखाड़ फेंकेगा और प्रदेश में नहीं इबारत लिखेगा।

शहर के एक होटल में आयोजित वार्ता में सपा जिलाध्यक्ष गोपाल यादव ने कहा कि भाजपा ने सिर्फ नफरत फैलाने की राजनीति की है। भाई से भाई को लड़ाने का काम किया है। ऐसी सांप्रदायिक शक्तियों के खिलाफ सपा और बसपा ने गठबंधन किया है। गठबंधन प्रदेश में लोकसभा की सभी सीटों पर जीतेगा। केंद्र सरकार को पौने पांच साल और प्रदेश सरकार को दो साल होने वाले हैं। लेकिन बेरोजगारी दूर नहीं हुई। किसान के हालात बदतर हैं।
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सपा-बसपा गठबंधन पिछड़ों, दलितों, किसानों, मजदूरों, नौजवानों और व्यापारियों का गठबंधन है। यह देश और प्रदेश की दिशा और दशा बदलेगा।सपा के गृह जिले में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के असर पर उन्होंने कहा कि पार्टी सीट को जीतने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। जहां तक मैनपुरी लोकसभा सीट से जुड़े जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र की बात है तो पार्टी पहले ही कह चुकी है कि नेता जी मुलायम सिंह यादव के सामने प्रत्याशी खड़ा नहीं करेंगे। 

बसपा जिलाध्यक्ष वीपी सिंह ने कहा कि वर्तमान में देश और प्रदेश के जो हालात हैं उसके लिए सपा-बसपा गठबंधन जरूरी था। केंद्र व प्रदेश सरकार केवल जुमलेबाजी की बातें करती हैं। इससे जनता का भला नहीं होने वाला है। इस दौरान सपा एमएलसी राकेश यादव ने कहा कि देश और प्रदेश की जनविरोधी सरकार ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। इस मौके पर पूर्व सांसद प्रेमदास कठेरिया, पूर्व चेयरमैन कुलदीप गुप्ता संटु, बसपा के वीरेंद्र सिंह यादव, वीरु भदौरिया, नरेंद्र जाटव आदि मौजूद रहे।  
 
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