कायमगंज। इफ्को केंद्र पर करीब 23 दिन से डीएपी खाद नहीं है। यहां किसान हर रोज आकर बिना खाद लिए आश्वासन की घुट्टी पीकर लौट जाते हैं। सोमवार को इफ्को केंद्र पर कई किसान खाद लेने पहुंचे और मायूस होकर लौट गए। किसानों का कहना है कि अगर समय से डीएपी न मिली तो आलू व सरसों की बुआई पिछड़ जाएगी।
इन दिनों आलू, सरसों और तंबाकू बुआई का सीजन चल रहा है। किसानों को बुआई के लिए डीएपी खाद की जरूरत है। डीएपी की मांग बढ़ने से हर साल की तरह इस साल भी खाद की किल्लत नजर आने लगी है। ऐसा अक्सर देखा गया कि जब डीएपी की जरूरत हुई तो केंद्र पर यूरिया मिली। वहीं, देखने में आया कि इफ्को केंद्र पर 324 बोरियां यूरिया रखी हैं। मगर अभी यूरिया खाद की जरूरत ही नहीं है। यूरिया खाद फसल की बढ़वार के लिए लगाई जाती है। किसानों का कहना है कि सहकारी समिति पर खाताधारकों को ही प्राथमिकता से खाद दी जाती है। निजी दुकानों पर खाद में मिलावट होती है या फिर दाम अधिक होते हैं। इससे अधिकतर किसान इफ्को केंद्र पर खाद वितरण का इंतजार करते हैं।
इफ्क केंद्र पर खाद लेने पहुंचे गांव लखनपुर निवासी किसान रामलाल ने बताया कि जरूरत के समय खाद की किल्लत होना कोई नई बात नहीं है। यह हमेशा ही होता है। कुछ बड़े किसान तो खाद का पहले ही स्टाक कर लेते हैं। उनका काम चल जाता है। 4-6 बोरी के जरूरतमंद किसान परेशान होते हैं। वितरण के दौरान खाद के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ता है।
गांव सरैया निवासी किसान श्रीनिवास ने बताया कि आलू की बुआई के लिए डीएपी लेने आए थे। स्टाक निल बताया गया। इन दिनों में हमेशा खाद के लिए चक्कर लगाने होते हैं। सरसों, आलू, तंबाकू की एक साथ बुआई शुरू होने से डिमांड बढ़ गई है।
इफको केंद्र पर मिले कर्मचारी राजेश कुमार ने बताया कि 12 अक्तूबर तक 700 बोरियां एनपीके खाद का वितरण हुआ था। डीएपी के लिए डिमांड भेज दी गई है। आने के बाद वितरण किया जाएगा।