इटावा। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को रबी फसलों की बुआई से पहले मृदा परीक्षण, संतुलित उर्वरक और बीज शोधन करने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों की थोड़ी सी जागरूकता से अच्छी पैदावार हो सकती है। जिले में सरसों, गेहूं के अलावा आलू की खेती भी बड़े पैमाने पर की जाती है। कृषि विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र कुमार बताते हैं कि मौसम का रुख देखते हुए वैसे तो सितंबर के अंत से ही आलू की खेती का काम शुरू हो जाता है। लेकिन इस बार आलू की बुआई अक्तूबर से नवंबर के बीच में की जा रही है। कई किसान 15 नवंबर से 25 दिसंबर तक पिछैती आलू की बुआई करते हैं। किसान रबी फसलों की बुआई से पहले खेत की मिट्टी की जांच करवाकर जैविक विधि से खाद तैयार करें। इससे पैदावार अच्छी मिलेगी साथ ही मिट्टी की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहेगी। इसके अलावा बीजों का शोधन करने से आलू सहित गेहूं व सरसों की फसल में नुकसान होने की संभावना कम हो जाती है। उन्होंने बताया कि आलू की बुआई के लिए खेत में तीन से चार बार गहरी जुताई करवानी चाहिए। जिसके बाद फसल बोनी चाहिए।