2008 में उसने तहसीलदार न्यायालय में वाद दायर किया। कई तारीखों के बाद नई डीएम दीपा रंजन की तैनाती हुई। वह पिता को लेकर उनसे फरियाद करने पहुंचा। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार डीएम के हस्तक्षेप पर 11 नवंबर 2022 को तहसीलदार न्यायालय ने फैसला उनके पक्ष में सुनाया।
न्याय मिला, हक नहीं
मंगल ने कहा कि पिता को जिंदा साबित करना था। पर अब तक उसका हक नहीं मिला है। बुआ ने खतौनी संख्या 1407-1412 खाता संख्या 222 की जमीन अपने नाम वरासत कराई थी। वरासत के बाद जमीन बेच दी थी। अब उस जमीन पर दूसरे का कब्जा है। वरासत में गाटा संख्या में पिता का नाम चढ़ गया है।
तहसीलदार कोर्ट से फैसले के बाद मंगल के पिता शेरा के नाम जमीन चढ़ गई है। जमीन वापस दिलाने के प्रयास किए जाएंगे। -दीपा रंजन, जिलाधिकारी, बांदा