हरिद्वार में निर्मम हत्या की शिकार हुई कौशल्या की मौत की खबर से गांव में मातम पसरा है। गांव की चौपाल से लेकर घरों के आंगन तक हर किसी की जुबान पर एक ही चर्चा है कि प्रेम-प्रसंग के फेर में एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया। सबसे ज्यादा चिंता उस मासूम बेटे की है, जो अभी तक अपनी मां की मौत की सच्चाई से अनजान है और उसके लौटने का इंतजार कर रहा है।
मृतका की पहली सास टंटी निषाद बताती हैं कि कौशल्या मेहनती और मिलनसार स्वभाव की थी। घर-परिवार के कामकाज में भी वह निपुण थी, लेकिन कुछ गलत फैसलों ने उसकी जिंदगी की दिशा बदल दी। उनका कहना है कि करीब एक साल पहले वह रिश्तेदारी के एक युवक के साथ चली गई थी। उस समय परिवार ने उसे समझाकर वापस लाया और गलती मानकर माफ भी कर दिया था।
बाद में उसने अपनी मर्जी से ओमप्रकाश उर्फ गोविंदा के साथ जीवन बिताने का फैसला किया, जिस पर परिवार ने कोई आपत्ति नहीं की। रविवार को जब पुलिस गांव पहुंची तो कौशल्या का बेटा अनीस सबसे यही पूछता रहा कि उसकी मां को पुलिस क्यों पकड़ा है।
मां का नाम लेते ही उसकी आंखें भर आती हैं। वह बार-बार घर के दरवाजे की ओर देखता है, मानो अभी उसकी मां लौट आएगी। मासूम की बेबसी देखकर गांव के लोग भी भावुक हो उठते हैं। कोई उसे गोद में लेकर चुप कराता है तो कोई यह कहकर दिलासा देता है कि उसकी मां जल्द वापस आ जाएगी।
शक के चलते घुमाने के बहाने हरिद्वार ले जाकर की पत्नी की हत्या
बताते चलें कि हरिद्वार में जंगल से बरामद एक विवाहित महिला के शव की गुत्थी को उत्तराखंड पुलिस ने सुलझाते हुए हमीरपुर तक पहुंची। पुलिस ने महिला के दूसरे पति को मौदहा व जेठ और नंदोई को बांदा से गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया कि युवक को महिला के किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क होने का संदेह था। इसी शक के चलते पति ने हत्या की साजिश रचकर अपने बड़े भाई और बहनोई के साथ मिलकर उसे मौत के घाट उतारकर हरिद्वार के जंगल में शव का चेहरा तेजाब से जलाकर फेंक दिया था।