उसने बताया था कि जमीन की बिक्री के 16 लाख रुपये के लिए उसने पिता की गला रेतकर हत्या कर दी थी। पीएसी मोड़ के पास झाड़ियों में चाकू छिपा दिया था। अनुराग की निशानदेही पर पुलिस ने सनिगवां निवासी अंकित कुमार को गिरफ्तार कर उसकी कार से 12 लाख 31 हजार रुपये बरामद कर लिए थे। एडीजीसी ने बताया कि अनुराग ने लूट की रकम अपने दोस्त अंकित के पास रखवा दी थी। अंकित को तीन साल की सज सुनाई गई। यह फैसला एडीजे 4 शैलेंद्र पांडेय ने सुनाया।
चचेरे भाइयों की गवाही से फंसा
मुकदमे में चंद्रशेखर के भतीजे अनूप पांडे और अमित तथा पड़ोसी बाबूराम की गवाही मुख्य रही। अनूप ने एफआईआर दर्ज कराई थी। कोर्ट में दोनों भतीजों ने बताया कि चाचा की चकेरी में पान की गुमटी थी। उन्होंने ग्राम जरकला की पैतृक जमीन बेची थी। जिसकी बिक्री में 16 लाख रुपये मिले थे। 8 लाख रुपये जमा कराने के लिए उन्होंने स्टेट बैंक चकेरी भेजा था लेकिन मैनेजर ने आय का स्रोत देने की बात कहकर रुपये जमा नहीं किए। चाचा ने पूरी रकम घर के बक्से में रखी थी। अनुराग बेरोजगार था। उसकी बुरी आदतों के कारण पिता-पुत्र में नहीं बनती थी। अनुराग व्यापार के लिए रुपये मांग रहा था, जिसे चाचा ने देने से मना कर दिया। इसी बात पर अनुराग ने हत्या कर दी।