अबजद से इसका नंबर निकालने पर 786 आता है
1000 और 500 रुपये की नोटबंदी के फैसले से 786 के लकी नंबरों का कलेक्शन करने वाले लोग मायूस हैं। आम तौर पर इस लकी नंबर के नोट को लोग सहेज कर रखते हैं और अक्सर शुभ कामों में इस नंबर के नोटों से ही शुरुआत करते हैं। चमनगंज निवासी शारिक अल्वी पिछले आठ सालों से 786 डिजिट के नोटों का कलेक्शन कर रहे हैं। उनके पास इस नंबर के सौ से ज्यादा नोट हैं। उनका कहना है कि आम तौर पर बेटी की शादी में रस्म, रिश्ता पक्का होने या शौहर मेहर की रकम में ऐसे नोटों का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसा करना शुभ माना जाता है। शारिक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र और ई मेल करके गुहार लगाई है कि वे उनकी और उनकी तरह कलेक्शन करने तमाम लोगों को इस डिजिट के नए नोट वापस करा दें। अरबी भाषा का एक शब्द है ‘अबजद’। इसका मतलब किसी भी विद्या को सीखने की पहली स्थिति है। किसी भी अरबी शब्द के नंबर निकालने की विधा से नंबर निकाले जाते हैं। इस्लाम में कोई भी शुभ काम करने से पहले बोला जाता है ...बिस्मिल्लाह हिर रहमानिर रहीम... अर्थात ‘शुरू करता हूं उस अल्लाह के नाम से जो बेहद रहम वाला है’। अबजद से इसका नंबर निकालने पर 786 आता है। अरबी के अक्षर अलिफ, बे, ते के नंबरों से वाक्य का नंबर निकाला जाता है। खास बात यह है कि अगर अरबी अक्षरों से ‘हरे कृष्णा’ का नंबर निकालें तो भी 786 नंबर ही प्राप्त होगा। इस हिसाब से यह हिंदू और मुस्लिम दोनों के लिए लकी नंबर है।