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दूर बैठे मास्टरमाइंड सोशल मीडिया के जरिए देश के युवाओं को कर रहे हैं गुमराह

Fri, 03 Nov 2017 02:23 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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डेमो पिक
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मौजूदा समय में देश की सीमाओं से ज्यादा खतरा सोशल मीडिया से लगता है। पहले आतंकवादी वही लोग बनते थे जो गरीबी और अशिक्षा से पीड़ित थे लेकिन अब सोशल मीडिया ने पढ़े-लिखे लोगों को आतंकवादी बनाना शुरू कर दिया है। दूर बैठे मास्टरमाइंड सोशल मीडिया के जरिए देश के युवाओं को बरगला रहे हैं और उन्हें अपनी टीम में शामिल कर रहे हैं।  
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ये बातें गुरुवार को राजस्थान कैडर के आईपीएस अधिकारी विकास कुमार ने आईआईटी कानपुर के स्थापना दिवस समारोह में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही। विकास कुमार को सत्येंद्र कुमार दुबे मेमोरियल अवार्ड 2017 से सम्मानित किया गया। विकास ने आईआईटी कानपुर से 1997 में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी। बतौर साफ्टवेयर इंजीनियर भारतीय रेलवे सहित कई बड़ी कंपनियों में काम किया। 2004 में उन्होंने सिविल सर्विसेज परीक्षा पास की और आइपीएस बन गए। पहले नागालैंड और अब राजस्थान एटीएस में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। 
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एटीएस में काम करते आतंकियों का सामना भी करना पड़ता है

आईपीएस विकास कुमार को किया गया सम्मानित
विकास बताते हैं कि एटीएस में काम करते हुए उन्हें आतंकियों का सामना भी करना पड़ता है लेकिन उन्हें कभी इसका भय नहीं रहा। विकास राष्ट्रपति और गृहमंत्री से भी सम्मानित हो चुके हैं।

हर चीज में आगे थे विकास 
विकास ने आईआईटी में पढ़ाई के दौरान की बातें साझा कीं। बोले वह हॉस्टल के प्रेसिडेंट हुआ करते थे, कई खेलों में उनकी रुचि थी और सिक्योरिटी टीम में भी उनका नाम शामिल था। उन्हें आईआईटी का बेस्ट आउटगोइंग रेजिडेंट अवार्ड भी मिला है।

पत्नी भी आईपीएस, पिता थे डीएम
विकास मूल रूप से बिहार के औरंगाबाद जिले के रहने वाले हैं। पिता अमरनाथ सिंह डीएम थे। विकास बताते हैं कि उनकी पत्नी परम ज्योती भी आईपीएस हैं और जयपुर क्राइम ब्रांच में तैनात हैं।
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