देश की सर्वोच्च हरित अदालत (एनजीटी) ने गंगा के किनारों से 500 मीटर की दूरी तक किसी भी प्रकार के कचरे को फेंकने पर पाबंदी लगा दी है और नदी को दूषित करने वाले किसी भी शख्स पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाए जाने का फर्मान जारी किया है।
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इस फरमान के बाद से चर्चाओं का बाजार गर्म है। आपकी जानाकारी के लिए बता दें इस आदेश के साथ गंगा के 100 मीटर के दायरे में कोई भी निर्माण अवैध करार दिया जाएगा। ऐसे निर्माण को हटाए जाने के लिए भी आदेश जारी किए गए हैं। इस सख्त आदेश के जारी होते ही पूरे उत्तर प्रदेश में जबरदस्त हलचल पैदा हो गई है।
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उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में बिठूर से लेकर सरसौल तक गंगा के किनारे 100 मीटर दायरे में हजारों कच्चे और पक्के निर्माण हैं। इनमें से कई 60-70 साल पुराने हैं तो कई अवैध रूप से हाल में बना लिए गए हैं।
शहरी सीमा में गंगा के लगभग हर घाट के किनारे एक बस्ती बसी हुई है। कई जगह तो गंगा के तट पर ही अवैध रूप से कच्ची बस्तियां बनाई गईं हैं। इतना ही नहीं जाजमऊ में गंगा के 100 मीटर के दायरे में 400 से 450 टेनरियां हैं। इसके अलावा अवैध रूप से संचालित दर्जनों ग्लू फैक्ट्रियां भी हैं। ड्रेनेज सिस्टम न होने के कारण इनकी गंदगी और कचरा सीधे गंगा में जाता है।
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नए निर्माणों पर 200 मीटर तक है रोक
कानपुर विकास प्राधिकरण (केडीए) ने हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में पहले ही गंगा किनारे 200 मीटर के दायरे में किसी भी निर्माण पर रोक लगा रखी है। पिछले दिनों कराए गए सर्वे के बाद केडीए ने इस दायरे में आ रहे करीब 80 अवैध निर्माणों को गिराने की तैयारी भी शुरू कर दी है।
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एक लाखकिलोग्राम रोज निकलता है कूड़ा
शहर में गंगा किनारे हुए निर्माणों और मोहल्लों से रोजाना करीब 100 मीट्रिक टन (एक लाख किलोग्राम) कूड़ा-कचरा रोज निकलता है। इसमें से 90 फीसदी कूड़ा नगर निगम उठा लेता है, लेकिन 10 फीसदी कूड़ा सीधे गंगा में बह जाता है।
- 450 टेनरियां और दर्जनों अवैध ग्लू फैक्ट्रियां भी चल रहीं