कोरोना संक्रमित मरीजों के इलाज में कारगर इंजेक्शन रेमडेसिविर की कालाबाजारी के मामले में पुलिस रेमडेसिविर की सप्लाई के नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। पुलिस ने पश्चिम बंगाल के दवा कारोबारी अपूर्वा की कॉल डिटेल खंगाली तो इंजेक्शन को सप्लायर द्वारा वाराणसी भेजने की बात सामने आई।
उसकी छह अलग-अलग नंबरों पर बातचीत होने की बात सामने आई है। पुलिस छह नंबरों में सप्लायर के नंबर की तलाश कर रही है। मिलिट्री इंटेलीजेंस के इनपुट पर यूपी एसटीएफ और बाबूपुरवा थाने की फोर्स ने किदवई नगर चौराहे के पास चेकिंग के दौरान बाइक सवार दोस्तों को 265 रेमडेसिविर इंजेक्शन के साथ पकड़ा था।
पकड़े गए शातिरों ने पूछताछ में अपना नाम बक्तौरीपुरवा नौबस्ता निवासी मोहन सोनी, पशुपति नगर निवासी प्रशांत शुक्ल और यमुना नगर हरियाणा निवासी सचिन कुमार बताया था। मोहन सरगना था। मोहन ने बताया था कि पश्चिम बंगाल के अपूर्वा मुखर्जी ने उसे इंजेक्शन बेचने के लिए भेजे थे। वाराणसी से यहां सप्लाई हुए थे।
अपूर्वा की कॉल डिटेल में वाराणसी के छह अलग-अलग नंबर मिले हैं। जिस पर इंजेक्शन की सप्लाई भेजने के दिन कई बार बातचीत हुई है। पुलिस इन नंबरों पर काम कर रही है। एसीपी गोविंद नगर विकास कुमार पांडेय ने बताया कि छह नंबर मिलने से यह साफ नहीं है कि सप्लाई देने वाले का नंबर कौन सा है। फिलहाल सभी नंबरों का ब्योरा जुटाया जा रहा है। नंबर की मदद से ही पुलिस सप्लायर तक पहुंचेगी।