स्मार्ट सिटी के लिए चयनित क्षेत्र में नई बिल्डिंगों के निर्माण में अब पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा जाएगा। ‘ग्रीन बिल्डिंग’ कॉन्सेप्ट पर भवन निर्माण को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार ने नगर निगम और केडीए को मॉडल बिल्डिंग बायलॉज-2016 की गाइड लाइन भेज दी है। इसके तहत निर्माण कार्यों के लिए नगर निगम से जुड़ी सभी जरूरी एनओसी ऑनलाइन सिंगल विंडो सिस्टम से मिलेंगी। मॉडल बायलॉज स्मार्ट सिटी के साथ ही अमृत योजना के क्षेत्रों में भी लागू होगा।
स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत चयनित शहरों में निर्माण कार्यों में एकरूपता लाने, विभिन्न विभागों की एनओसी एक ही जगह मिलने और पर्यावरण सुरक्षा के लिहाज से निर्माण को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने मॉडल बिल्डिंग बायलॉज-2016 बनाया है। इस पर अमल कराने के लिए शहरी विकास मंत्रालय सभी राज्यों को गाइड लाइन भेज रहा है। नए बायलॉज के तहत सभी इमारतों में रेन वॉटर हार्वेस्ंिटग सिस्टम, रूफटॉप सोलर प्लांट लगवाना अनिवार्य होगा। ऐसा करने वालों को टैक्स में राहत देने का भी प्रावधान है।
इसके साथ ही 30 दिन में सभी जरूरी एनओसी भी जारी होंगी। ऐसा न होने पर इन्हें स्वीकृत मान लिया जाएगा। यहां लागू होगा नया बायलॉज स्मार्ट सिटी के लिए चयनित क्षेत्र माल रोड से लेकर कंपनी बाग तक होने वाले निर्माण में यह बायलॉज लागू होगा। इसके अलावा अमृत योजना जैसे सीवर लाइन और वॉटर लाइन में भी यह लागू होगा। ग्रीन बिल्डिंग मतलब यहां ग्रीन बिल्डिंग का मतलब पर्यावरण को ज्यादा से ज्यादा फायदा पहुंचाने से हैं। जैसे वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम होना, सोलर प्लांट होना, भवन का ऐसा निर्माण कराना कि लाइटों का कम से कम इस्तेमाल हो जैसी बातों का ध्यान रखा जाएगा। कोट निगम के अधिशासी अभियंता आरके सिंह ने बताया कि शहरी विकास मंत्रालय ने मॉडल बिल्डिंग बायलॉज-2016 के प्रावधानों की प्रति भेजी है। प्रावधानों का अध्ययन करने के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी।