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Kanpur News: हवा में थोड़ा सुधार, पीएम 2.5 का खतरा बरकरार

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कानपुर। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में पांचवें स्थान पर पहुंचे शहर को हवा की गुणवत्ता सुधार के लिहाज से अभी लंबा सफर तय करना है। भले ही शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) सुधरा हो लेकिन पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 की मानक से तीन से चार गुना अधिक मात्रा शहरवासियों की सांसों पर भारी पड़ रही है। हवा में घुले धूल, राख के यह महीन कण हर साल गंभीर बीमारियों की वजह बन रहे हैं। सोमवार को भी शहर में पीएम 2.5 का औसत स्तर 140 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रहा जबकि भारतीय परिस्थितियों में इसकी 40 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर तक की मात्रा सुरक्षित मानी जाती है।
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सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) की जारी रिपोर्ट में कानपुर का नाम सर्वाधिक प्रदूषित 10 शहरों की सूची से हटना सुखद है। हालांकि इन सुखद आंकड़ों के बीच पीएम 2.5 के आंकड़े चिंता भी पैदा करते हैं। शहर में पीएम 2.5 के सालाना औसत की बात करें तो यह हमेशा गंभीर स्थिति में ही रहा है। 2019 में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम की शुरुआत हुई थी। इसका उद्देश्य 2025-26 तक पीएम 2.5 के स्तर में 40 फीसदी की कमी करना है। शहर के आंकड़ों को देखें तो अभी लक्ष्य बहुत दूर दिखता है। इस साल 18 जून से 20 सितंबर तक जब शहर का एक्यूआई मध्यम यानी अधिकतम 93 के स्तर तक रहा, इस दौरान भी पीएम 2.5 की स्थिति स्वीकृति मात्रा से दोगुनी ही रही। पीएम 2.5 के साथ ही इससे छोटे पीएम .1 यानी अल्ट्राफाइन मैटर भी शहरवासियों की सेहत बिगाड़ रहे हैं। कुल मिलाकर स्थिति थोड़ा सुधरा है, बहुत सुधार की जरूरत है वाली ही है।

अल्ट्राफाइन पार्टिकल सबसे ज्यादा हानिकारक

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य व वरिष्ठ चेस्ट फिजिशियन डॉ. एसके कटियार ने कहा कि पीएम 2.5 के साथ ही इससे छोटे अल्ट्राफाइन पार्टिकल सबसे ज्यादा हानिकारक होते हैं। यह फेफड़ों के साथ ही खून में मिलकर पूरे शरीर में फैल जाते हैं और हृदय, लिवर, ब्रेन, किडनी आदि महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं। प्रदूषण के इस स्तर पर धूम्रपान बेहद हानिकारक है। जो लोग धूम्रपान या तंबाकू का सेवन करते हैं प्रदूषित हवा उनकी ओर से रोजाना पी जाने वाली सिगरेट की संख्या या तंबाकू की मात्रा में इजाफा कर रही है। साथ ही यदि कोई सिगरेट पी रहा है तो उससे भी दूरी रखनी जरूरी है। अधिक प्रदूषण वाले स्थानों से दूरी बनाएं। धुंध में सुबह एक्सरसाइज करने से बचें क्योंकि इस दौरान ज्यादा सांस खींचनी पड़ती है और इससे अधिक प्रदूषित हवा शरीर में जाती है। हर हाल में मास्क लगाकर ही बाहर निकलें।
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वातावरण में नमी होने की वजह से प्रदूषण की मात्रा में इजाफा होता है। यह स्थिति अक्सर जाड़े के माैसम में ज्यादा आती है। नमी होने की वजह से प्रदूषण के कण आपस में चिपक कर जमीन से करीब तीन किलाेमीटर ऊपर एक परत के रूप में जमा हो जाते हैं। अधिक समय तक यह स्थिति होने से आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत होने लगती है। खासकर दमा के रोगियों के लिए यह स्थिति ज्यादा खतरनाक होती है। डाॅ. एसएन सुनील पांडेय, माैसम विशेषज्ञ
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