कानपुर में बहन की हत्या में मासूम (छह साल) की गवाही पर अपर जिला जज षष्टम की अदालत ने मकान मालकिन और उसके दो बेटों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। शादी से इनकार पर 16 साल पहले अंजाम दी गई इस वारदात के तीनों दोषियों पर कोर्ट ने 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी किया है। मामले में आरोपी मकान मालिक की मुकदमे के दौरान मौत हो चुकी है।
बर्रा सात स्थित रोशन लाल कठेरिया के मकान में कुसुमा सिंह अपनी तीन बेटियों के साथ किराये पर रहती थीं। इकलौता बेटा रोहित पढ़ाई के सिलसिले में जेठ के साथ रहता था। पति की मौत के बाद कुसुमा प्राइवेट नौकरी कर घर चलाती थीं।
मकान मालिक रोशन लाल, उसकी पत्नी माया, बेटे नितिन और सचिन बड़ी बेटी रचना पर नितिन से शादी करने का दबाव डालते थे। इनकार करने पर 21 अक्तूबर 2003 को रोशन लाल ने पत्नी व बेटों के साथ मिलकर रचना की हत्या की और शव को फंदे पर लटकाकर सभी फरार हो गए।
घटना के वक्त कुसुमा काम पर गई थीं और दोनों छोटी बेटियां रोली व दीक्षा स्कूल में थीं। एडीजीसी जितेंद्र कुमार पांडेय ने बताया कि स्कूल से लौटी बेटियों ने आरोपियों को शव को फांसी पर लटकाते देख लिया था।
कोर्ट में रोली (वारदात के वक्त उम्र छह वर्ष) ने अभियुक्तों के खिलाफ गवाही दी, लेकिन दीक्षा, कुसुमा, रोहित और जेठ शिवबालक बयानों से मुकर गए। सभी को पक्षद्रोही घोषित किया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला कसने के कारण दम घुटने से मौत की बात सामने आई थी। इस रिपोर्ट और रोली की गवाही पर अपर जिला जज षष्टम डॉ. कपिला राघव की अदालत ने तीनों को सजा सुनाई।