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छह माह पहले की बेटी की शादी

Sun, 03 Jul 2016 01:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
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इंद्रा नगर निवासी मृतक महेश कुमार सिंह व उनकी बहू की मौत पर रोते परिजन।  - फोटो : amarujala
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कानपुर। उन्नाव के पास सड़क हादसे में कार सवार एसबीआई माल रोड के चीफ मैनेजर, उनकी पत्नी और बहू की मौत से परिवार की खुशियां पल भर में छिन गईं। छह माह पहले इंद्रानगर स्थित अपने आवास से उन्होंने  बेटे की धूमधाम से शादी की थी। शनिवार को हादसे में तीनों की मौत की सूचना पाकर उनके घर पहुंचे रिश्तेदारों और पड़ोसियों की आंखों में आंसू थे। सब मनहूस पल को कोस रहे थे।
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पांच दिसंबर 2015 में एसबीआई माल रोड के चीफ मैनेजर महेश सिंह (58) ने धूमधाम से अपने इंजीनियर बेटे सौरभ की शादी दिल्ली निवासी लवी से की थी। इस विवाह समारोह में औरैया स्थित बिधूना के राजपुरा गांव से उनका पूरा परिवार शामिल होने को इंद्रानगर स्थित उनके आवास पहुंचा था। बुजुर्ग चाचा उदयवीर सिंह और रघुबीर अपनेे आंसू पोंछते हुए सिर्फ इतना ही बोल पाए कि क्या पता था कि शादी के बाद अब ऐसे मौके पर घर आना होगा, जब दरवाजे पर खड़े होने वाला कोई भी अपना नजर नहीं आएगा।
बच्चों को दी बेहतरीन तालीम
महेश कुमार ने अपने दोनों बच्चों बेटी चित्राली और बेटे सौरभ को बेहतर तालीम देने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। दोनों ने अपने मुकाम को पा लिया। चित्राली डाक्टर बन गई और सौरभ पूना में इन्फोसिस कंपनी में इंजीनियर है। लवी भी इन्फोसिस में इंजीयिनर थी। छह साल पहले चित्राली की शादी राजस्थान उदयपुर मंसौर निवासी डा. ऋतिक से हुई थी। जिस पर चित्राली ने भी वहीं अपनी भी पोस्टिंग करा ली। चित्राली की बेटी नैना जन्म से ही नाना-नानी के साथ रह रही थी। वह दोनों की लाड़ली थी।
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बैंक के कामकाज में नहीं लगा मन
बैंक में मैनेजर महेश की मौत की खबर पहुंचते साथी अधिकारी और कर्मचारी भी अवाक रह गए। किसी का काम में मन नहीं लगा। जिसको जब मौका लगा, वह काम निपटा कर सीधे उन्नाव या इंद्रानगर के लिए दफ्तर से निकल पड़ा। साथी सहायक मैनेजर अशोक दिवाकर ने दुखी होकर कहा कि भाई साहब महेश जी का चेहरा नहीं भूल पा रहा हूं।

चीफ मैनेजर ही  चला रहे थे कार
चीफ मैनेजर के परिजनों ने बताया कि एयरपोर्ट से लौटते वक्त महेश स्वयं ही कार चला रहे थे, क्योंकि वह इस कोशिश में थे कि यदि समय मिल गया तो बैंक भी चले जाएंगे। इस वजह से भी कार की रफ्तार थोड़ी ज्यादा थी, उस पर महेश सीट बेल्ट भी नहीं लगाए थे। देर रात बहू लवी के मायके पक्ष के लोग भी इंद्रानगर पहुंच गए। चाचा उदयराज ने बताया कि महेश का बेटा साॅफ्टवेयर कंपनी में इंजीनियर है, और वह देर रात या सुबह तक कानपुर  पहुंच जाएगा।

नानी-नाना को तलाशती रहीं नैना की आंखें
उन्नाव (ब्यूरो)। महेश कुमार, पत्नी बीना व बहू लवी की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। फ्लाइट छोड़कर पोस्टमार्टम हाउस पहुंची उनकी बेटी चित्राली व दामाद का रो-रोकर बुरा हाल था। इस दौरान उनकी मासूम बेटी नैना की आंखें नाना-नानी को तलाशतीं रहीं। नाना-नानी की लाड़ली को इस बात का एहसास भी नहीं था वह जिन्हें वह तलाश रही है, वे दुनिया छोड़कर जा चुके हैं।

वृद्ध मां पर टूटा दुखों का पहाड़
हादसे की खबर के बाद पड़ोसियों का घर पर मजमा लगते अचानक महेश की मां राजकुमारी (75) बेसुध सी हो गईं। उधर लखनऊ एयरपोर्ट पर रूबी को अपने माता-पिता और भाभी की मौत की जानकारी हुई तो उदयपुर जाने की बजाए इंद्रानगर लौट आई। घर पर दादी को देखते ही रूबी चीखकर बोली, अम्मा मेरा तो कोई नहीं बचा। दोनों की चीखें सुनकर मोहल्ले की महिलाओं की भी आंखें भर आईं।
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