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फर्रुखाबाद: पालिका की गोशालाओं के एक रात में 6 गोवंश मरे, आधा दर्जन से अधिक भर रहे अंतिम सांसें

Fri, 27 Sep 2019 07:29 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, फर्रुखाबाद
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कुछ ऐसी है गायों की स्थिती - फोटो : अमर उजाला
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फर्रुखाबाद में गोवंश के लिए शासन भले ही गंभीर है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इनके पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। हरा चारा खाने को नहीं मिलता, बारिश में बैठने को सूखी जगह भी नहीं। गुरुवार रात सातनपुर स्थित गोशाला में पांच गोवंश, जबकि ट्रांजिट हॉस्टल में एक गाय ने दम तोड़ दिया। वहीं दोनों गोशालाओं में आधा दर्जन से अधिक तड़प रहे गोवंश अंतिम सांसें भर रहे हैं।
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छाया को पर्याप्त टीनशेड न होने से सर्दी लगने से गोवंश के मरने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल शवों को बिना पोस्टमार्टम कराए गोशाला से लोडर पर लदवाकर भेज दिया गया। शहर व ग्रामीण क्षेत्रों में राहगीर से लेकर किसानों के लिए मुसीबत का सबब बने छुट्टा गोवंश से लोगों को निजात नहीं मिल पा रही है। वहीं, गोवंश का संरक्षण भी सही ढंग से होता नहीं दिख रहा। शहर में तीन अस्थायी गोशाला का संचालन नगरपालिका कर रही है।

 

इनमें 630 गोवंश रखने का दावा किया जा रहा है। गोशालाओं का संचालन कर रहे नगरपालिका के विजय शुक्ला ने बताया कि ट्रांजिट हॉस्टल स्थित आश्रय स्थल में 220, कटरी धर्मपुर में 215 व सातनपुर गोशाला में 110 गोवंश हैं। जबकि कुल गोवंश की संख्या 630 बताई। वहीं, सातनपुर के गोरक्षक ने 70 गोवंश होने की जानकारी दी। इस हिसाब से कुल 505 गोवंश हो रहे, जबकि आंकड़े 630 के भरे जा रहे।
 
सातनपुर गोशाला में गोवंश दुर्दशा के शिकार 
सातनपुर की अस्थायी गोशाला के हालात देखें तो गुरुवार रात यहां पांच गोवंश की मौत हो गई। यहां न तो पर्याप्त टीन शेड है और न ही बैठने को जगह। टंकी के पास जलभराव से तालाब का नजारा दिख रहा है। कीचड़ में घूमते गोवंश को बैठने के लिए सूखी जगह भी नसीब नहीं हो रही। गोरक्षक की जानकारी के अनुसार यहां 70 गोवंश बंद हैं। एक माह में यहां 11 गोवंश मर चुके हैं।

 

रात में मरे पांच गोवंश के शव शुक्रवार सुबह पालिका के लोडर से कटरी धर्मपुर स्थित जंगल में भेजवा दिए गए। इन दिनों हो रही बारिश में भीगकर बीमार हो रहे हैं। अभी बीमार चार गाय अंतिम सांसें गिन रही हैं। उसने बताया कि टीन शेड डलवाने की व्यवस्था तो कई माह पहले से चल रही है, लेकिन अभी तक बन नहीं सका। गोशाला में डॉक्टर भी तीसरे-चौथे दिन आते हैं। गोवंश को हरा चारा देखने को नहीं मिलता। हालांकि भूसा और दाना पर्याप्त मात्रा में है। 

ट्रांजिट हॉस्टल स्थित गोशाला में भी पर्याप्त छाया नहीं 
पुलिस लाइन के निकट स्थित ट्रांजिट हॉस्टल में पालिका की अस्थायी गोशाला संचालित है। यहां 220 गोवंश रखे जा रहे हैं, जबकि टीनशेड 70-80 गोवंश के लिए ही उपलब्ध है। गोशाला में बंद गोवंश की यहां भी स्थिति ठीक नहीं है। रात में एक गाय मर गई, जबकि तीन गाय व एक बछिया बीमारी से तड़प रही हैं।

 
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यहां देखरेख कर रहे कर्मचारी ने बताया कि रात को मरी गाय सुबह पालिका के लोडर से ले जायी गई। छाया की पर्याप्त व्यवस्था न होने से गोवंश भीगकर सर्दी से बीमार हो रहे हैं। सुबह से डॉक्टर झांकने तक नहीं आए, जबकि बीमार गाय तड़प रही हैं। जिम्मेदारों के ध्यान न देने से गोशाला तो मरणशाला बनती जा रही है। 

निमोनिया से मरे गोवंश 
डॉ.सतेंद्र सिंह ने बताया कि नगरपालिका की सातनपुर स्थित गोशाला में जलभराव हो जाता है। पानी निकास की भी व्यवस्था नहीं है। गोवंश की संख्या के सापेक्ष छाया न होने और मौसम में ठंडक होने से गोवंश निमोनिया के शिकार हो रहे हैं। दोपहर में उन्होंने गोशाला पहुंचकर तीन गोवंशों का इलाज किया है। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा.राजकिशोर सिंह ने बताया कि वह कानपुर मीटिंग में हैं। उन्हें गोवंश मरने के संबंध में जानकारी नहीं है।
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