ग्रामीणों का कहना है कि अब प्रधान व सचिव ने शेष जानवरों को छोड़ दिया है। यह फसलों को नुकसान पहुंचाने लगे हैं। ग्राम प्रधान आत्माराम का कहना है कि वह चारे पानी की व्यवस्था अपने निजी खर्च पर कर रहे थे। पांच आवारा जानवर आपस में लड़ कर घायल हुए थे। डॉक्टर ने इलाज भी किया था। कुछ मर भी गए हैं। अराजक लोगों ने गोशाला का ताला तोड़ इन्हें भगा दिया है। यह छोड़े नहीं गए हैं। ग्रामीणों का आरोप गलत है।
पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विकराल सिंह का कहना है कि दो मवेशियों की मौत हुई थी। गोशाला की देख-रेख के लिए भोजराज को रखा गया था। प्रधान के खाते में पशुओं के चारे पानी की व्यवस्था को धनराशि भी भेज दी गई है। और कोई जानकारी नहीं है। वहीं पीडी रामचंद्र शर्मा ने कहा कि यह गंभीर मामला है। उन्हें जानकारी नहीं है। जांच कराकर कड़ी कार्रवाई करेंगे।