कानपुर में 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों की जांच कर रही एसआईटी ने दिवंगत पूर्व राज्य मंत्री शिवनाथ सिंह कुशवाहा के भतीजे को आरोपी बनाया है। एसआईटी का दावा है कि आरोपी की दंगों में बड़ी भूमिका थी। हत्या, डकैती और आगजनी में उसकी संलिप्तता थी। इसके पुख्ता साक्ष्य मिले हैं। एसआईटी और साक्ष्य व गवाह जुटा रही है। आरोपी लंबे समय से उरई में रह रहा है। उसे जल्द ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।
सिख विरोधी दंगों की जांच के लिए फरवरी 2019 में शासन ने एसआईटी गठित की थी। एसआईटी ने हत्या और डकैती के 10 केसों की विवेचना शुरू की है। एसआईटी थाने के प्रभारी इंस्पेक्टर अशोकधर पांडेय ने बताया कि मूलरूप से घाटमपुर निवासी राघवेंद्र कुशवाहा की दंगों में अहम भूमिका थी। राघवेंद्र पूर्व राज्यमंत्री दिवंगत शिवनाथ सिंह कुशवाहा का भतीजा है। दंगा भड़काने से लेकर वारदात को अंजाम देने में भी वह शामिल रहा था। विवेचना के दौरान उसके खिलाफ साक्ष्य और गवाह मिले हैं। उसी आधार पर विवेचना में उसका नाम खोला गया है। एसआईटी की टीम ने उसके बारे में प्रत्येक जानकारी का सत्यापन भी करवा लिया है। निगरानी की जा रही है, जिससे वह कहीं फरार न हो जाए।
बसों में भरकर दंगाइयों को बाहर से लाता था राघवेंद्र
इंस्पेक्टर ने बताया कि शहर में हुए सिख दंगों में बर्रा, नौबस्ता, गोविंद नगर, काकादेव, पनकी आदि थानों में मुकदमे दर्ज हुए थे। अब तक की जांच में लगभग हर केस में राघवेंद्र कुशवाहा का नाम सामने आ रहा है। गवाह और साक्ष्य दोनों मिले हैं। इंस्पेक्टर ने बताया कि राघवेंद्र की बसें चलती थीं। दंगों में वह ग्रामीण क्षेत्रों से सैकड़ों लोगों को अपनी बसों में लेकर कानपुर आता था। लोग हत्या, लूटपाट और आगजनी कर दंगा फैलाते थे। दंगाइयों का नेतृत्व राघवेंद्र ही करता था।
ये अहम साक्ष्य, दो और बड़े लोग बन सकते हैं आरोपी
इंस्पेक्टर अशोकधर पांडेय ने बताया कि 28 नवंबर 1984 को तत्कालीन सांसद रामनारायण त्रिपाठी ने एक बयान दिया था। जिसमें राघवेंद्र कुशवाहा के दंगों में शामिल होने की बात कही थी। लिखित बयान भी उपलब्ध है। इसकी जो खबर अखबार में प्रकाशित हुइ थी, उसे एसआईटी ने जुटा लिया है। कोर्ट में इन दस्तावेजों को एसआईटी प्रमुखता से प्रस्तुत करेगी। इसके अलावा शहर की एक बड़ी हस्ती व उनके बेटे और भतीजों का भी नाम सामने आ रहा है। चूंकि अभी पुख्ता साक्ष्य नहीं मिले हैं इसलिए फिलहाल उनको आरोपी नहीं बनाया गया है। इंस्पेक्टर का कहना है कि लूट व आगजनी में इनके खिलाफ कुछ तथ्य सामने आए हैं। जांच चल रही है।
सरकार का था संरक्षण, नहीं बनाया था आरोपी
एसआईटी थाना प्रभारी के मुताबिक दंगों में बहुत बड़ा हाथ राघवेंद्र का था लेकिन एक भी एफआईआर में उसका नाम दर्ज नहीं था। इंस्पेक्टर के मुताबिक सरकार के दबाव में पुलिस ने उसको आरोपी न बनाकर बल्कि संरक्षण दिया था। वर्तमान में राघवेंद्र की उम्र करीब 65 वर्ष के करीब है।
पूर्व राज्यमंत्री स्व. शिवनाथ सिंह कुशवाहा की प्रोफाइल
-1974 में कांग्रेस पार्टी से घाटमपुर सीट से चुनाव लड़कर पहली बार विधायक बने।
- 21 फरवरी 1975 से 30 अप्रैल 1977 तक वह विधानसभा उपाध्यक्ष भी रहे।
- 1980,85 और 91 में वह घाटमपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए।
- इनको राज्यमंत्री बनाया गया, गन्ना, नगर विकास समेत आठ विभाग दिये गए थे।
- 28 अक्तूबर 2018 में उनका निधन हो गया।
सिख दंगा एक नजर में
कानपुर में 127 लोगों की जानें गईं थीं
1255 मुकदमें दर्ज हुए थे
29 मामले हत्या व हत्या (302)कर डकैती की धारा(396) के दर्ज हुए थे
11 मामले में चार्जशीट दाखिल हुई थी