कानपुर। रुपये लेकर नौ राज्यों के 14 नामी विश्वविद्यालयों की डिग्री थमाने के मामले की जांच में जुटी एसआईटी तीन नए बिचौलियों की कुंडली खंगाल रही है। यह नोएडा, हापुड़ और अलीगढ़ के रहने वाले बताए जा रहे हैं। बीते दिनों नोएडा से गिरफ्तार कर जेल भेजे गए आरोपी विनीत से पूछताछ में इनके बारे में पता चला। ऐसे में एसआईटी की टीम अब इन सदस्यों के बैंक खातों, कॉल डिटेल्स और यूनिवर्सिटी के लोगों से संपर्क कर उनके बारे में जानकारी जुटा रही है। इसके अलावा झारखंड, मणिपुर और सिक्किम गईं टीमें वहां दस्तावेजों का सत्यापन कर रहीं हैं।
18 फरवरी को किदवईनगर पुलिस ने जूही गोशाला चौराहे के पास शैल ग्रुप ऑफ एजुकेशन में दबिश दी थी। कार्यालय से पुलिस ने 14 विश्वविद्यालयों और उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज की एक हजार से ज्यादा मार्कशीट और डिग्री बरामद की थीं। इनमें बीटेक, एमटेक, बीफार्मा, डीफार्मा, एलएलबी आदि की डिग्री शामिल थीं। पुलिस ने मौके से चार आरोपियों को भी गिरफ्तार किया था। यह लोग वर्ष 2012 से डिग्रियां, माइग्रेशन व अंकपत्र बनवाने का काम कर रहे थे। गिरोह का मास्टरमाइंड शैलेंद्र कुमार ओझा था। पुलिस ने शैलेंद्र के साथ नागेश मणि त्रिपाठी,जोगेंद्र और अश्वनी कुमार सिंह को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा था। एसआईटी प्रभारी योगेश कुमार ने बताया कि गिरोह के नेटवर्क का पता लगाने के लिए प्रयास किया जा रहा है।