आईआईटी, एनआईटी और ट्रिपल आईटी में एडमिशन के लिए सिंगल एंट्रेंस टेस्ट और काउंसलिंग का प्रस्ताव मंगलवार को आईआईटी काउंसिल ने सिरे से खारिज कर दिया। इसकी पुष्टि आईआईटी कानपुर के निदेशक और काउंसिल के सदस्य प्रो. इंद्रनील मन्ना ने की है।
मीटिंग में हिस्सा लेने के बाद प्रो. मन्ना ने कहा कि सिंगल एंट्रेंस टेस्ट और काउंसलिंग संभव नहीं है। इसलिए सत्र 2015-16 की एडमिशन प्रक्रिया पुरानी नियमावली से पूरी की जाएगी। आईआईटी काउंसिल की महत्वपूर्ण मीटिंग मंगलवार को मुंबई में हुई। इसकी अध्यक्षता मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने की।
मीटिंग के दौरान ही आईआईटी, एनआईटी और ट्रिपल आईटी की एडमिशन प्रक्रिया में कोचिंगों का महत्व खत्म करने की रणनीति बनी। इसी सिलसिले में पांच आईआईटी के बोर्ड ऑफ गवर्नर (बीओजी) के चेयरमैन की कमेटी गठित की गई है। इस कमेटी को एक महीने (नवंबर में) के अंदर रिपोर्ट देनी है।
कमेटी को बताना है कि कोचिंगों का दबाव कैसे कम किया जा सकता है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले स्टूडेंटों को कोचिंग पर काफी फीस खर्च करनी पड़ती है। मीटिंग में हिस्सा लेने वाले आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना ने बताया कि सभी संस्थानों में एडमिशन की एक प्रवेश परीक्षा या फिर काउंसलिंग संभव नहीं है। इस पर काउंसिल ने विचार करने से इंकार कर दिया है। अब पहले ज्वाइंट एंट्रेंस टेस्ट (जेईई) मेन 2016 का आयोजन होगा।
इसमें सेलेक्शन पाने वाले डेढ़ लाख रैंक तक के स्टूडेंट ज्वाइंट एंट्रेंस टेस्ट (जेईई) एडवांस 2016 का फार्म भरेंगे। यह टेस्ट सिर्फ आईआईटी में एडमिशन के लिए होता है। एडवांस का आयोजन 22 मई 2016 को होगा। इससे पहले ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। एनआईटी और ट्रिपल आईटी की सीटें जेईई मेन की 60 फीसदी मेरिट और 40 फीसदी बोर्ड मार्क्स को आधार बनाकर भरी जाती हैं।
जेईई मेन की मेरिट लिस्ट बोर्ड रिजल्ट के बाद आती है। असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति की नियमावली बदली ः काउंसिल ने आईआईटी में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति की नियमावली बदल दी है। अब असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति पांच साल के लिए अनुबंध (एडहॉक) पर की जाएगी। अभी तक असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति एक साल के प्रोबेशन पीरियड पर होती थी। प्रोबेशन पीरियड ठीक नहीं गुजरा तो नियुक्ति निरस्त कर दी जाती थी। नई व्यवस्था से शिक्षकों की नियुक्ति में तेजी आएगी। ज्यादा से ज्यादा शिक्षक आईआईटी से जुड़ने की कोशिश करेंगे। इससे शिक्षकों का संकट खत्म होगा। आईआईटी कानपुर में ही शिक्षकों के 300 से ज्यादा पद खाली हैं।