अलग-अलग धर्मों के लिए अलग-अलग सिविल कानून न होना ही 'समान नागरिक संहिता' की मूल भावना है। जिसे हम कॉमन सीविल कोड भी कहते हैं। वहीं दूसरी तरफ इन दिनों देश में मुस्लिम पर्सनल लॉ को लेकर बहस छिड़ी है।
कॉमन सिविल कोड के खिलाफ आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने हस्ताक्षर अभियान चलाया है। इसके तहत रविवार को कानपुर के चमनगंज में तकरीबन 28 हजार मुसलमानों ने हस्ताक्षर किए। इसके अलावा सात हजार हस्ताक्षरों के लिए फार्म घरों में पहुंचाए गए।
कैंप में हस्ताक्षर वाले फार्म के सेटों में जिन बिंदुओं पर सहमति में हस्ताक्षर कराए गए उसमें मुस्लिम अपने पर्सनल लॉ में कोई तब्दीली नहीं चाहते, तलाक, निकाह, विरासत, हिबा आदि धार्मिक आजादी में कोई हस्तक्षेप नहीं चाहते हैं।
बरेलवी विचारधारा के शहरकाजी मौलाना आलम रजा नूरी, शिया शहरकाजी मौलाना अली अब्बास खां नजफी ने मौजूद होकर मुस्लिम पर्सनल लॉ का समर्थन किया। साथ ही कहा कि शरीअत के मामलों में मुसलमानों को जो आजादी संविधान की धारा 25, 26 में मिली है, उसमें छेड़छाड़ न की जाए।