औरैया के कंचौसी रेलवे स्टेशन पर शनिवार को हुए ऑटोमैटिक सिग्नल प्रणाली का फाल्ट 28 घंटे बाद रविवार को दोपहर करीब तीन बजे सही हो सका। फाल्ट सही होने के बाद कंचौसी रेलवे क्रासिंग का फाटक खुल सका। फाल्ट सही होने पर सबसे पहले असम से नई दिल्ली जा रही कामाख्या सुपरफास्ट ट्रेन को अपलाइन से हरे सिग्नल से गुजारा गया।
कंचौसी रेलवे क्रासिंग के पास शनिवार को दोपहर 12:30 बजे बिजली का पोल गाड़ने का काम हो रहा था। उसी दौरान ऑटोमैटिक सिग्नल प्रणाली की भूमिगत (अंडर ग्राउंड) केबल में फाल्ट हो गया। इससे कंचौसी रेलवे स्टेशन की ऑटोमैटिक सिग्नल प्रणाली पूरी तरह से ठप हो गई। इससे रेलवे क्रासिंग का फाटक भी बंद हो गया। इससे रेलवे कर्मचारियों में अफरातफरी मच गई।
रविवार को दिन में तीन बजे ठीक हुआ फाल्ट, बंद क्रासिंग खुली
इससे तकरीबन पौन घंटे तक डाउन और अप ट्रैक प्रभावित रहा। इस दौरान दिल्ली-हावड़ा रूट पर डाउन लाइन पर आ रहीं ट्रेनों को रेलवे कर्मचारियों ने कॉसन देकर निकाला। कंचौसी से फफूंद रेलवे स्टेशन को सूचना देने पर वहां से ऑटोमैटिक सिग्नल प्रणाली का तकनीकी स्टाफ आया और फाल्ट खोजना शुरू किया। शनिवार को पूरी रात मशक्कत के बाद भी फाल्ट नहीं खोज जा सका।
तब रविवार को सुबह टूंडला, इटावा और कानपुर में सूचना देकर ऑटोमैटिक सिग्नल स्टाफ को बुलाया गया। सुबह से फाल्ट को खोजने का काम चला, जो दोपहर 3 बजे सही हो पाया। 24 घंटे से अधिक का समय गुजर जाने के बाद रेलवे क्रासिंग खुलने से लोगों ने राहत की सांस ली। उधर, इस संबंध में कंचौसी के स्टेशन प्रबंधक विशम्भर दयाल पांडेय का कहना है कि दोपहर 3 बजे तकनीकी स्टाफ ने फाल्ट सही कर दिया, इसके बाद स्थिति सामान्य हो गई है।
सबसे पहले हरे सिग्नल से गुजारी गई कामाख्या सुपर फास्ट ट्रेन
रेलवे क्रासिंग भी खुलने लगी है। कंचौसी स्टेशन से फाल्ट सही होने पर आसाम से नई दिल्ली जा रही कामाख्या सुपरफास्ट ट्रेन को हरे सिग्नल से गुजारा गया। उन्होंने बताया कि बिजली विभाग से अनुबंध किए एलएनटी कंपनी के सुपरवाइजर को फफूंद आरपीएफ हिरासत में लिए हुए है, रेलवे बिजली विभाग के ऊपर जुर्माना की भी कार्रवाई करेगी।
उन्होंने बताया कि अप और डाउन लाइन से कंचौसी स्टेशन से ट्रेनों को कॉसन देकर गुजारा जा रहा है। शनिवार को दोपहर से लेकर रविवार को दोपहर तक लखनऊ-नई दिल्ली शताब्दी एक्सप्रेस, बनारस-दिल्ली वंदे भारत एक्सप्रेस, हावड़ा-कालका एक्सप्रेस, पुरी-नई दिल्ली एक्सप्रेस, नीलांचल एक्सप्रेस समेत तीन सौ ट्रेनों को कॉसन देकर गुजारा गया।