Shri Krishna Janmotsav: अष्टमी तिथि तीन सितंबर की रात 2.25 से शुरू होकर चार सितंबर की रात 12.3 पर समाप्त होगी। जन्माष्टमी के दिन उदयातिथि से लेकर रात तक रोहिणी नक्षत्र का संयोग रहेगा।
इस बार कान्हा की जन्माष्टमी रोहिणी नक्षत्र के दुर्लभ संयोग में शुक्रवार को मनाई जाएगी। पंचांग के मुताबिक अष्टमी तिथि तीन सितंबर की रात 2:25 बजे शुरू होकर चार सितंबर की रात 12:13 बजे समाप्त होगी। रोहिणी नक्षत्र तीन सितंबर की रात 12:29 बजे शुरू होकर चार सितंबर की रात 11:04 बजे तक रहेगा। जन्माष्टमी के दिन उदयातिथि से लेकर रात तक रोहिणी नक्षत्र का संयोग बना रहेगा। व्रत और जन्मोत्सव चार सितंबर को मनाया जाएगा।
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ज्योतिषाचार्य पं. मनोज कुमार द्विवेदी ने बताया कि कान्हा जी का जन्म मध्यरात्रि में अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। इस बार जन्माष्टमी पर भी इसी तरह का संयोग बन रहा है। अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का एक साथ होना विशेष फलदायी रहेगा। श्री कृष्ण जन्मोत्सव की पूजा का शुभ समय चार सितंबर की रात 11 बजकर 57 मिनट से पांच सितंबर की रात 12 बजकर 43 मिनट तक रहेगा। भक्तजन लगभग 46 मिनट की अवधि में लड्डू गोपाल का जन्मोत्सव और पूजा-अर्चना कर सकते हैं।
राशि के अनुसार ऐसे करें कान्हा की पूजा मेष : बाल गोपाल को लाल या केसरिया वस्त्र पहनाकर लाल चंदन का तिलक लगाएं। मिश्री-गुड़ का भोग लगाएं और तुलसी की माला से ॐ क्लीं कृष्णाय नमः का 108 बार जाप करें। वृषभ : सफेद या रजत रंग के वस्त्र पहनाएं। माखन-मिश्री और सफेद रसगुल्ले का भोग लगाकर सुख-समृद्धि के बाद चांदी की छोटी बांसुरी अर्पित करें। मिथुन : हरे वस्त्र पहनाकर धनिया की पंजीरी तुलसी के पत्ते पर रखकर अर्पित करें। इसे मानसिक तनाव दूर करने वाला माना गया है। कर्क : सफेद या पीले रेशमी वस्त्र पहनाएं। खीर, मावा और पेड़े का भोग लगाएं। दक्षिणावर्ती शंख से गंगाजल से अभिषेक कर पीला चंदन लगाएं। सिंह : गुलाबी, सुनहरे या नारंगी वस्त्र अर्पित करें। माखन-मिश्री या सूखे मेवों का भोग लगाकर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जाप करें।
कन्या : हरे या गहरे रंग के वस्त्र पहनाएं और मोरपंख से शृंगार करें। माखन, मिश्री और हरी इलायची अर्पित करें। तुला : भगवा या हल्के पीले वस्त्र पहनाएं। धनिया की पंजीरी, मिश्री और कलाकंद का भोग लगाएं। वृश्चिक : लाल या मैरून पोशाक पहनाएं। गुड़ का हलवा और माखन-मिश्री अर्पित कर दक्षिणावर्ती शंख से स्नान कराएं। धनु : पीतांबर पहनाएं और पीले फल, बेसन के लड्डू या केसर की खीर का भोग लगाएं। मकर : नीले या बहुरंगी वस्त्र पहनाएं। मिश्री, माखन और काली मिर्च का भोग अर्पित करें। कुंभ : नीले या आसमानी वस्त्र पहनाएं। धनिया की पंजीरी और मेवे में तुलसी डालकर भोग लगाएं। मीन : गहरे पीले या केसरिया वस्त्र पहनाएं। केसरयुक्त पंचामृत, मिश्री और माखन अर्पित करें। पीला चंदन लगाकर झूला झुलाएं।
जन्माष्टमी पर विशेष खगोलीय संयोग
चिंतक इंस्टीट्यूट ऑफ वैदिक साइंसेज के संस्थापक डॉ. रमेश चिंतक का कहना है कि भाद्र मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र जयंती योग बनाते हैं जो दुर्लभ संयोग है। यह नव ऊर्जा का संचार करता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार यदि मध्यरात्रि को रोहिणी नक्षत्र का पूर्ण संयोग न भी मिल रहा हो तो भी जिस तिथि की शुरुआत या पूर्व भाग में रोहिणी का स्पर्श होता है, उसी रात्रि को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव का मुख्य पूजन और व्रत किया जाता है।