ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी फ्लिपकार्ट के नोएडा स्थित ठिकानों पर वाणिज्यकर विभाग की हुई कार्रवाई के बाद लिंक जुड़ने पर कानपुर में जांच पड़ताल की गई।
फ्लिपकार्ट ने कानपुर में जिन दो फर्मों से माल की खरीद दर्शायी थी, उनके से एक अस्तित्व में नहीं मिली और दूसरी फर्म में ऑनलाइन कंपनी को माल बेचने का कोई रिकार्ड नहीं मिला। अफसरों ने रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी है।
एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-2 केशव लाल ने बताया कि फ्लिपकार्ट के नोएडा स्थित दफ्तर में विभागीय जांच पड़ताल हुई थी। जांच में सामने आया कि ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी ने फर्जी खरीद दिखाकर 49 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी की है। कंपनी की ओर से प्रदेश के कई शहरों से फर्जी खरीद दिखाई गई।
इस खरीद पर वह आईटीसी भी क्लेम कर रही थी। फ्लिपकार्ट ने कानपुर में भी सुचिता इंटरप्राइजेज नाम की दो फर्मों से माल की खरीद दिखाई थी। नोएडा के एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 के निर्देश पर गुरुवार को नयागंज में पड़ताल कराई गई। एक फर्म का पता ही नहीं मिला। दूसरी फर्म गड़रियन मोहाल स्थित बागला बिल्डिंग में मिली।
यहां फर्म के दस्तावेज देखने के बाद पता चला कि यहां से फ्लिपकार्ट को माल नहीं बेचा गया। जांच करने वाली एसआईबी टीम में असिस्टेंट कमिश्नर विजय कुमार, अशोक कुमार, नरेंद्र यादव, केके गौतम राजेंद्र जौहरी, चंद्रशेखर आदि शामिल थे।
मशीन निर्माता फरार कर्मियों ने उगला राज
कानपुर। पान मसाला मशीन निर्माता नरेंद्र श्रीवास्तव तीसरे दिन भी आयकर अधिकारियों के शिकंजे में नहीं आए। उनकी फरारी के दौरान उनकी फर्मों और गेस्ट हाउस के कर्मचारियों ने टैक्स चोरी के तरीकों का सारा राज खोल दिया।
आयकर अधिकारियों को करोड़ों रुपये टैक्स चोरी के दस्तावेज मिले हैं। आवास, फैक्ट्री और गेस्ट हाउस समेत सभी संपत्तियां सील कर दी गई हैं।
आयकर अधिकारियों ने बताया कि बीते तीन दिन से जारी जांच में बेनामी संपत्तियों के भी सबूत मिले हैं। इसके अलावा एक करोड़ की मशीन को 10 लाख रुपये में बेचना दिखाया गया है।
कई दस्तावेजों में प्रोडक्शन और बिक्री के आंकड़ों में भी भिन्नता है। कर्मचारियों ने बताया कि प्रदेश और बाहरी राज्यों के पान मसाला निर्माताओं को मशीनें सप्लाई की जाती हैं। इस पर आयकर अफसरों ने 50 से अधिक पान मसाला निर्माताओं पर निगाह गड़ा दी है।
नरेंद्र श्रीवास्तव के अब तक कुछ सात ठिकानों में अधिकारियों ने छापामारी की है। अधिकतर स्थानों पर ताला लगा मिला। सूत्र बताते हैं कि सोशल मीडिया के जरिए ही वे अपने क्लाइंट से बात करते थे। अधिकारियों का मानना है कि अलग-अलग फर्मों के जरिए व्यवसाय करके नरेंद्र ने अकूत दौलत बनाई है।