सोशल मीडिया पर एक फोटो वायरल हुई है जिसमें सपा नेता महताब आलम बेड पर दीवार के सहारे बैठा है और शिवपाल कुर्सी पर बैठकर उससे बातचीत कर रहे हैं। हालांकि जिस शख्स ने अपनी फेसबुक वॉल पर ये फोटो शेयर किया है वह खुद सपा नेता है। फोटो को शेयर करते हुए लिखा गया कि - पैर की सर्जरी के बाद महताब आलम का हाल जानने पहुंचे विकास पुरुष शिवपाल सिंह यादव, लगभग 45 मिनट बंद कमरे में दोनों की हुई बातचीत। कानपुर के जाजमऊ में ढाई महीने पहले निर्माणाधीन इमारत ढहने से हुई 10 लोगों की मौत के आरोपी सपा नेता महताब आलम के घर बुधवार को शिवपाल सिंह यादव पहुंचे थे।
जानें, कौन है महताब आलम
महताब आलम
जाजमऊ इलाके में एक फरवरी को ढही निर्माणाधीन बिल्डिंग महताब आलम की थी। हादसे के बाद से महताब फरार है। कानपुर विकास प्राधिकरण ने महताब और दो ठेकेदारों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या समेत कई संगीन धाराओं में चकेरी थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। महताब के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी हुआ था। इसके बाद से महताब आलम फरार रहा। बात ये भी सामने आई कि वह पश्चिम बंगाल भाग गया था। इस पर पुलिस की एक टीम वहां भेजी गई लेकिन वह नहीं मिला। बीस दिन पहले ही महताब ने कोर्ट से गिरफ्तारी पर स्टे ऑर्डर ले लिया लेकिन सरेंडर नहीं किया था। सत्ता के गलियों में महताब आलम की सेटिंग कितनी जबरदस्त थी इसका अंदाजा केवल इसी से लगाया जा सकता है कि पुलिस उसे ढूंढती रही। घर की कुर्की के ऑर्डर तक पास हो गए लेकिन उसे गिरफ्तार नहीं किया जा सका।
तोड़ा गया महताब का अवैध पुल
महताब आलम के दोनों घरों के बीच में बना पुल ढहा दिया गया
सत्ता के रसूख में सपा नेता महताब आलम की दो इमारतों के बीच बनवाया गया अवैध पुल बृहस्पतिवार को केडीए दस्ते ने तोड़ दिया। अवैध निर्माणों के खिलाफ जारी अभियान में केडीए के दस्ते ने चकेरी क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से काटी जा रही कॉलोनियों को ध्वस्त कर दिया। इस दौरान अवैध कब्जेदारों ने मामूली विरोध भी किया, लेकिन फोर्स ने उन्हें खदेड़ दिया। 6.63 करोड़ रुपये की जमीन कब्जा मुक्त कराई गई।
बीती एक फरवरी को जाजमऊ स्थित गज्जूपुरवा में सपा नेता महताब आलम की छह मंजिला अवैध इमारत ढह गई थी। इसमें दबकर 10 श्रमिकों की मौत हो गई थी और कई घायल हो गए थे। इस दौरान घटनास्थल पर पहुंचे अधिकारियों को दो इमारतों के बीच अवैध रूप से बनाए गए पैदल पुल की जानकारी मिली थी। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते ही केडीए अधिकारियों ने पुल को महताब का मान लिया और करीब साढ़े तीन माह बाद इसे गिरा भी दिया गया। केडीए के अधिशासी अभियंता मनोज मिश्रा ने बताया कि इस प्रकार अवैध पुल को बिना नोटिस गिराए जाने का प्रावधान है। इसके अलावा देहली सुजानपुर, गज्जूपुरवा में अभियान चलाकर 6630 वर्गमीटर जमीन खाली कराई गई। इस दौरान अधिशासी अभियंता लव उपाध्याय, तहसीलदार बीएल पाल, एई रवींद्र कुमार, मो. सैयद मेंहदी, जेई इम्तियाज अहमद, सतवीर सिंह, राकेश चंद्र गुप्ता, एके अस्थाना व जनार्दन आदि रहे।