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Shivoham: कैलाश खेर बोले- AI शरीर दे सकता है रूह नहीं, संघर्ष ही कलाकार को मांजता है; स्वच्छता का दिया संदेश

Sat, 28 Feb 2026 03:52 PM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: अमर उजाला के ‘शिवोहम’ कार्यक्रम के लिए शहर पहुंचे गायक कैलाश खेर ने संगीत को साधना बताया और कानपुरवासियों से स्वच्छता व व्यसनमुक्ति की अपील की। उन्होंने जोर दिया कि तकनीक के दौर में भी मानवीय संवेदनाएं और रूहानी संगीत सर्वोपरि रहेगा।
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कैलाश खेर - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर में अमर उजाला के ‘शिवोहम’ कार्यक्रम में पहुंचे सुप्रसिद्ध सूफी गायक कैलाश खेर ने कहा कि एआई के दौर में आत्मा की आवाज को मशीन नहीं दबा सकती। तकनीक सहायक हो सकती है, लेकिन रूह से निकले सुर का कोई विकल्प नहीं होता। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगीत केवल ध्वनि या व्यवसाय नहीं, बल्कि साधना है और साधना का स्थान कोई कृत्रिम माध्यम नहीं ले सकता।

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कैलाश खेर ने कहा कि आज संगीत के क्षेत्र में कॉरपोरेट संस्कृति का प्रभाव बढ़ा है, लेकिन सच्चे संगीत की राह पर चलने वाले को कोई डिगा नहीं सकता। यदि समर्पण सच्चा हो और प्रयास निरंतर हों, तो सफलता निश्चित मिलती है। उन्होंने कहा। उनके अनुसार समय बदलता है…साधन बदलते हैं, लेकिन सुर की सच्चाई और साधना की शक्ति स्थाई रहती है।

स्वच्छता भी एक प्रकार की साधना है
कानपुर को लेकर उन्होंने विशेष रूप से कहा कि यह केवल औद्योगिक शहर नहीं, बल्कि क्रांतिकारियों और अध्यात्म की धरती है। गंगा के किनारे अध्यात्म पनपता है। इस शहर की मिट्टी में संघर्ष की ऊर्जा और साधना की गहराई दोनों मौजूद है। उन्होंने शहरवासियों से अपील की कि अपना शहर स्वच्छ रखें और पान मसाला जैसी आदतों से दूर रहें। स्वच्छता भी एक प्रकार की साधना है।

संघर्ष ही कलाकार को मांजता है
जिस शहर में हम रहते हैं, उसकी गरिमा बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। अपने संगीत सफर को याद करते हुए कैलाश खेर ने बताया कि वर्ष 2007 से उनके करियर की नई दिशा बनी। इस दौरान अनेक उतार-चढ़ाव आए, लेकिन आस्था और अध्यात्म के मार्ग पर चलते हुए उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने कहा कि संघर्ष ही कलाकार को मांजता है और कठिनाइयां ही उसे मजबूत बनाती हैं।
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संगीत मेरे लिए पेशा नहीं, साधना है
युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि वे केवल लोकप्रियता के पीछे न भागें, बल्कि अपनी आत्मा की आवाज को पहचानें और निरंतर अभ्यास करते रहें। संगीत मेरे लिए पेशा नहीं, साधना है। यह कहते हुए उन्होंने दोहराया कि सच्ची लगन और समर्पण ही स्थाई सफलता का मार्ग प्रशस्त करते हैं। युवा हमेशा प्रोत्साहित रहें और मेहनत करें।
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