टीवी कलाकार शयंक शुक्ला
एक प्रश्न का जवाब देते हुए शयंक कहते हैं कि "अभिनय में मेरी रुचि बचपन से ही रही , माँ से सुना है कि भूख लगने पर रोने का अभिनय करता था। वही से मेरे अभिनेता बनने का सफर शुरू हुआ, जीवन के अनुभवों ने अभिनय की बारीकियों से अवगत कराया । जैसे जैसे बचपन से ज़वानी की तरफ बढ़ता गया मेरे दिल को ऐक्टिंग से महोब्बत हो गई। कहते हैं जिस काम में दिल लगे वही करना चाहिए , तो हमने भी अपने दिल की सुनी और नुक्कड़ नाटकों, थियेटर मे काम करना शुरू कर दिया। कानपुर मे कुछ बहुत काम करने के बाद मुम्बई शहर में आने का मन बनाया । हमारे शहर के परिवारों में अभिनेता बनने की ख्वाईश रखना आसान नहीं होता । मेरे लिए भी ये चीजें आसान नहीं थी । मगर हौसला बुलंद था । मेहनत और विश्वास का हाथ थामे , किस्मत की राह पकड़ मुम्बई आ गया । शुरूआती दिनों में इस शहर की ठोकरों ने हौसले को और बुलंद किया।"