इस बार पौष मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या पांच जनवरी (शनिवार) को पड़ रही है। शनिवार होने के कारण इसे शनैश्चरी अमावस्या भी कहते हैं। इस दिन दान-पुण्य से पितृ दोष दूर होंगे। इसके अलावा केतु और शनि की पीड़ा से भी मुक्ति पाई जा सकती है।
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आचार्य विधुशेखर पांडेय और आचार्य सत्येंद्र अग्निहोत्री ने बताया कि इस दिन मूल नक्षत्र पड़ने के कारण यह तिथि काफी असरकारक हो जाती है। इस दिन किए गए उपाय बहुत ही प्रभावी होते हैं।
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मूल नक्षत्र के स्वामी केतु है। अमावस्या तिथि भी राहु और केतु के प्रभाव के कारण मानी जाती है। ऐसे में केतु और शनि की शांति के लिए इस दिन पका अन्न दान किया जा सकता है।
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इसके अलावा पितृ दोष का निवारण भी किया जा सकता है। सामान्य गृहस्थ पकी हुई काली उड़द और पके चावल का दान करें। इससे उनको लाभ होगा। इसके साथ ही पितृ दोष का पूजन भी किया जा सकता है।