कानपुर। जेल से निकलने के बाद घर जाते हुए फोन पर शालू की तकलीफ उनकी जुबान पर आ ही गई। सुब्रत को लेकर किए गए सवाल के जवाब पर शालू ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि सुब्रत ने पापा को क्यों मारा और उन्हें क्यों फंसाया। उन्होंने गार्ड से कभी नहीं कहा था कि शुभम नाम का व्यक्ति आ रहा है, मैंने सिर्फ इतना ही बोला था कि मेरा स्टाफ आ रहा है, उसे आने दो। सुब्रत को ऐसा नहीं करना चाहिए था क्योंकि पति-पत्नी के बीच विश्वास का गहरा रिश्ता होता है और सुब्रत ने उसी रिश्ते को तार-तार कर दिया। उसे तो शायद भगवान भी माफ नहीं करेगा। शालू के मुताबिक फिलहाल उसे अपने बेटे जय की फ्रिक है। उस मासूम को अब तक कुछ नहीं मालूम है। पिता से सुब्रत के रिश्ते के सवाल पर कहा कि उन्हें नहीं मालूम था कि दोनों के बीच इस कदर रिश्ते खराब हो गए हैं। हालांकि रिमांड के दौरान सुब्रत ने उनसे कहा था कि वह निर्दोष है।
विधिक राय लेकर की जाएगी वसीयत पर चर्चा
विनीत मिनोचा की वसीयत में शालू का नाम नहीं है और सुब्रत अब जेल में है। विनीत की पत्नी पुनीता की बहू शालू से नहीं पटरी नहीं खाती है। ऐसे में अब शालू-सुब्रत के बेटे जय का जायदाद पर हक का सवाल उठता है। इस बारे में शालू के भाई धीरज का कहना है कि परिवार के लोग मिलकर बैठेंगे। इस पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा जल्द ही विधिक राय लेकर वसीयत पर भी चर्चा की जाएगी। जय को उसका हक दिलाने का पूरा प्रयास किया जाएगा।