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Kanpur News: सीएसजेएमयू के नाम पर चल रहीं कई फर्जी वेबसाइट

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कानपुर। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) की ओर से फर्जी वेबसाइट के संचालन को लेकर लंबे समय से विद्यार्थियों व अभिभावकों को आगाह किया जा रहा है। फर्जी वेबसाइट पर रिजल्ट से लेकर एडमिशन तक सब हो रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि संभवत फर्जी मार्कशीट बनाने वाले गिरोह ऐसी ही वेबसाइट का प्रयोग कर छात्रों को भ्रमित करते हैं। हालांकि अभी तक पुलिस की ओर से कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
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विवि के अनुसार दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान कई बार फर्जी वेबसाइट बने होने की शिकायत मिली। इस पर अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय की असली वेबसाइट csjmu.ac.in है। फर्जी वेबसाइट का पूरा पेज डिजाइन विवि की अधिकारिक वेबसाइट जैसा ही है। विवि प्रशासन ने अपनी अधिकारिक वेबसाइट पर ऐसी पांच वेबसाइट को फर्जी बताते हुए अलर्ट जारी किया है। विवि के अधिकारियों की माने तो पुलिस से संबंधित फर्जी मार्कशीट सत्यापन के लिए आने के बाद ही सही-गलत का पता लग सकेगा।

सीएसजेएमयू के नाम से फर्जी वेबसाइट

http://kanpuruniversityresults.org/
http://www.csjmuniversity.co.in/
http://www.csjmkanpuruniversity.org/
http://csjmu.co.in/
https://resultskanpuruniversity.org/

हर माह सामने आते हैं मामले, कई लेयर पर होता सत्यापन
कानपुर। सीएसजेएमयू में हर महीने देश-विदेश से सैकड़ों दस्तावेज सत्यापन के लिए आते हैं, जिन्हें नौकरियां देने वाली कंपनियां या उच्च शिक्षण संस्थान भेजते हैं। इनमें से लगभग 15-20 दस्तावेज फर्जी पाए जाते हैं और इनकी निगेटिव रिपोर्ट बनाकर संबंधित को वापस भेज दिया जाता है। विश्वविद्यालय में दस्तावेजों का सत्यापन कई स्तरों पर किया जाता है। अंकों में संदेह होने पर इसे सरकारी गजट से मिलाया जाता है। कुछ समय पहले गजट में अंकों में बदलाव की कोशिश पकड़ी गई थी, जिसके बाद आरोपी को जेल भेजा गया और अब गजट के अंक ऑनलाइन स्कैन कर सुरक्षित कर दिए गए हैं, जिससे किसी तरह का बदलाव असंभव है।
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वहीं सभी रिकार्ड रूम और कंप्यूटर रूम सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में हैं और कर्मचारियों की तैनाती नियमित रूप से बदलती रहती है। सत्यापन में डिग्री के कागज, फांट, रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर, कोर्स की वैधता, सीरियल नंबर और अंक तालिका की जांच शामिल है। विवि अधिकारियों ने बताया कि पुलिस ने गिरोह के पास से डिप्टी रजिस्ट्रार का फर्जी स्टैंप भी बरामद किया है, जबकि वर्तमान में इसका विश्वविद्यालय में कोई उपयोग नहीं है।
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