कानपुर। किशोर को बंधक बनाने और जान से मारने की कोशिश करने वाले को अपर जिला जज 20 नीलांजना ने सात साल कैद और छह हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। 13 साल बाद मुुकदमे का फैसला मंगलवार को आया।
साकेतनगर निवासी व्यक्ति का 15 वर्षीय बेटा 31 मार्च 2012 को लापता हो गया था। पिता ने किदवईनगर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। अगले दिन बेटा घर लौट आया। उसने बताया कि पीपीएम अस्पताल भाई को देखने जाते समय अनवरगंज रेलवे काॅलोनी निवासी मो. नफीस उर्फ अन्ना मिला। वह रामादेवी ले गया और जूस पिलाया। जूस पीने के बाद बेहोश हो गया। होश आने पर खुद को एक कार में लखनऊ में पाया। जब उसने घर जाने की बात कही तो अन्ना ने रस्सी से गला कसने की कोशिश की। इस पर वह फिर बेहोश हो गया। मो. नफीस लौटा और गाड़ी बाहर खड़ी कर अपने घर चला गया, तभी मौका पाकर किशोर गाड़ी की खिड़की खोलकर भाग निकला था। एडीजीसी संजय कुमार झा ने बताया कि अभियोजन की ओर से पिता-पुत्र समेत सात गवाह कोर्ट में पेश किए गए। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने मो. नफीस को दोषी मानकर सजा सुनाई।