आयकर विभाग के कॉरपोरेट सर्किल ने गुरुवार दोपहर कपिला पशु आहार और उसकी सहयोगी कंपनी कामधेनु कैटल फीड की रनिया और दतियागंज स्थित फैक्ट्री और जरीब चौकी स्थित मुख्यालय पर छापेमारी की।
आयकर आयुक्त केएम बाली के निर्देशन और संयुक्त आयकर आयुक्त वृंदा देसाई के नेतृत्व में डिप्टी कमिश्नर प्रदीप सिंह गौतम, अमरेश तिवारी, ज्योत्सना देवी, असिस्टेंट कमिश्नर केके मिश्रा, सौरभ आनंद समेत सत्तर अधिकारियों ने छापेमारी की।
आयकर निदेशालय के डिप्टी डायरेक्टर तरुण कुशवाहा, असिस्टेंट डायरेक्टर अभिनव प्रकाश को भी खासतौर पर कार्रवाई में शामिल किया गया। सूत्रों के मुताबिक छानबीन में फैक्ट्रियों में मौजूद स्टॉक और किताबों में दर्ज स्टॉक के बीच काफी अंतर पाया गया है।
कंपनी के निदेशक सुरेंद्र नाथ शिवहरे से भी अफसरों ने पूछताछ की। उधर नकद लेनदेन से संबंधित तमाम कागजात भी अधिकारियों के हाथ लगे हैं। देर रात तक अधिकारी छानबीन करते रहे। अधिकारियों ने कार्रवाई पूरी होने पर टैक्स चोरी के आंकड़े बताने की बात कही है।
वहीं, श्याम नगर स्थित सेंट्रल ऑर्डनेंस डिपो (सीओडी) में गुरुवार को विजिलेंस टीम के आधा दर्जन अधिकारियों ने घंटों छानबीन की। इस मौके पर फैक्ट्री का मुख्य द्वार बंद कर दिया गया। न तो किसी को भीतर आने दिया गया और न ही कोई व्यक्ति फैक्ट्री के बाहर गया।
बताते हैं कि फैक्ट्री में निजी ठेकेदारों का माल रखे जाने के अलावा सीओडी की भूमि पर कब्जा करवाने संबंधी शिकायतों पर यह कार्रवाई की गई है।
सीओडी में पैराशूट फैक्ट्री और हार्नेस फैक्ट्री का तैयार माल रखा जाता है। यहां से यह माल आर्मी व अन्य सुरक्षा बलों को मुहैया कराया जाता है।
सूत्रों के मुताबिक कुछ गोपनीय पत्र हाल ही में डिफेंस विजिलेंस हेडक्वार्टर को भेजे गए थे। इसमें आरोप लगाया गया था कि कुछ निजी ठेकेदारों से आर्मी को सप्लाई का माल तैयार करवाया गया है लेकिन इस माल पर मेड इन फैक्ट्री की मुहर लगाकर डिपो में रखवा दिया गया है।
इस तरह बड़ा घपला और क्वालिटी से समझौता किया गया है। पत्र के साथ इस बाबत कुछ सबूत भी दिए गए हैं। इस सूचना पर गुरुवार को लखनऊ हेडक्वार्टर से विजिलेंस के छह अधिकारी दोपहर साढ़े बारह बजे डिपो में आए। उन्होंने फैक्ट्री का मुख्य गेट बंद करवा दिया।
इसके बाद सभी विभागों में बारी-बारी से जांच-पड़ताल की गई। शाम छह बजे तक चली इस कवायद के चलते किसी भी अधिकारी-कर्मचारी के आने-जाने पर रोक लगा दी गई।
सूत्रों की मानें तो यहां से उन्हें कुछ संदिग्ध दस्तावेज के अलावा एक डायरी मिली है, जिसमें कुछ आपत्तिजनक ब्यौरा दर्ज है। इसके बाद सीओडी की भूमि पर जानबूझकर कब्जा करवाने की शिकायत को लेकर विजिलिेंस अधिकारियों ने एक अधिकारी को जमकर फटकार लगाई।
बताते हैं कि टीम के अधिकारी यहां सप्लाई हुए रिकॉर्ड और दोनों आयुध निर्माणियों में तैयार हुए माल के रिकॉर्ड का सत्यापन करेंगे। उसके बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी। उधर डिपो के ब्रिगेडियर राकेश कपूर ने छापे की कार्रवाई की जानकारी तक होने से इंकार किया है।
उधर, वाणिज्य कर विभाग की एसआईबी टीम ने गुरुवार को ट्रांसपोर्टनगर में छापेमारी की। इस दौरान एक प्रमुख पान मसाला बनाने वाली कंपनी के बंद कारखाने में उत्पादन होता मिला।
छानबीन में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी के प्रमाण मिले। वहीं विभाग के मोबाइल दस्तों ने भी अलग-अलग जगह से छह ट्रकों को पकड़ा, जिन्हें सीज कर दिया गया है।
विभाग के एडिशनल कमिश्नर (ग्रेड-2) एसके उपाध्याय ने बताया कि एसआईबी की चारों यूनिट के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से ट्रांसपोर्ट नगर स्थित एवीएल फ्रेगरेंस नाम की फर्म पर छापा मारा। पूर्व में यह फर्म तिरंगा, हुजूर, फाइव थाउजेंट आदि नामों से पान-मसाले का उत्पादन करती थी।
इधर फर्म ने माल उत्पादन न किए जाने का दावा करते हुए विभाग को पत्र दिया था। मगर यहां गुपचुप तरीके से उत्पादन चलने की सूचना मिल रही थी, इसी आधार पर यहां कार्रवाई की गई। जांच में मौके पर पान मसाला उत्पादन की बात पुख्ता हुई।
यह भी पता चला है कि छोटे जिलों में यहां से बनने वाले माल की बिक्री की जा रही थी। मौके से तमाम कागजात मिले हैं, जिनकी छानबीन की जा रही है।
कुल मिलाकर मामला कई करोड़ की टैक्स चोरी से जुड़ा पाया गया है। इसी क्रम में विभाग के मोबाइल दस्ते के प्रभारी राजेश यादव और अनिल दीक्षित ने बहती के माध्यम से होने वाले टैक्स चोरी पकड़ी।
विभिन्न रूट पर दोनों अधिकारियों ने ड्राईफ्रूट, सरसों के तेल, चॉकलेट और परचून के माल से भरी छह गाड़ियां पकड़ीं। ट्रक के ड्राइवरों ने जो कागजात दिखाए, उसके आधार पर छानबीन हुई तो पता चला कि जिन फर्मों तक माल पहुंचाया जाना है, वे फर्जी हैं। सारा माल शहर में ही अनलोड किया जाना था।