तेजी से बदल रहे मौसम को ध्यान में रखकर किसान बीज बोएं। साथ ही प्राकृतिक आपदा से बचने के लिए फसलों का बीमा भी अवश्य कराएं। समूह बनाकर वैज्ञानिकों से मिलें और खेतों में उन्नत तकनीक अपनाएं।
किसानों को यह सीख कमिश्नर मो. इफ्तिखारुद्दीन ने बृहस्पतिवार को सीएसए के स्टेडियम ग्राउंड में चल रहे तीन दिवसीय एग्रोक्लाइमेटिक जोन स्तरीय विराट किसान मेले के समापन समारोह में दी। इस दौरान सीएसए के कुलपति प्रोफेसर एल. गोस्वामी, उपनिदेशक कृषि वीके सिंह ने विचार रखे।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. हरिश्चंद्र सिंह ने मक्का और डॉ. पीएन अवस्थी ने गेहूं की खेती के बारे में बताया। कमिश्नर ने अनुदानित योजना के तहत किसानों को मानव शक्ति चालित छिड़काव मशीन भेंट की।
कार्यक्रम में उप कृषि निदेशक महेंद्र सिंह, विजय कुमार, पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एसपी वर्मा, सहायक निदेशक रेशम आरके कटियार, डॉ. सरस तिवारी, विनोद यादव, शशिकेश सिंह और गणेश सिंह मौजूद रहे।
बढ़ रहीं बीमारियां, सरकार वैज्ञानिक दें ध्यान
कानपुर। आधुनिक कृषि के नाम पर जिस तरह खेतों में अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशक दवाइयों का उपयोग हो रहा है, वह हानिकारक है। इससे लोगों में बीमारियां बढ़ रहीं हैं।
यह कहना है अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रो. जाबीर हसन खान का। वह डीजी पीजी कॉलेज सिविल लाइंस में ‘आधुनिक कृषि के पारिस्थितिक एवं सामाजिक प्रभाव’ विषय पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि सरकार और वैज्ञानिकों को अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों के उपयोग के बारे में ध्यान देना होगा। भूगोल विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन प्रो. खान और प्राचार्य डॉ. मीता जमाल ने किया।