कानपुर देहात। शिवली थाना क्षेत्र के जरैला पुरवा से गुरुवार सुबह बच्चों को लेकर स्कूल जा रही वैन गांव के बाहर अनियंत्रित होकर खड्ड में पलट गई। इससे नौ बच्चे घायल होकर वैन में फंस गए। खेतों में काम कर रहे किसानों ने घायल बच्चों को वैन से बाहर निकाला। मौके पर पहुंची पुलिस ने सभी बच्चों को शिवली सीएचसी में भर्ती करवाया। वहां डॉक्टर ने तीन बच्चों की हालत नाजुक देख उनको हैलट कानपुर रेफर कर दिया।
मैथा स्थित एसजीएम चिल्ड्रन एकेडमी के बच्चों को लेकर एक वैन गुरुवार सुबह जरैला पुरवा से स्कूल जा रही थी। गांव के बाहर पहुंचते ही वैन अनियंत्रित होकर खड्ड में पलट गई। इससे वैन में मौजूद जरैला पुरवा निवासी कक्षा पांच के छात्र अमन पाल (12) पुत्र महेंद्र कुमार, सीटू पाल (10) पुत्र पंकज पाल, कक्षा चार के उत्कर्ष पाल (9) पुत्र अनिल पाल, कक्षा छह की तान्या पाल (11) पुत्री अनिल पाल, निशु पाल (11) पुत्री घनश्याम पाल, कक्षा आठ की रोशनी (13) पुत्री पंकज कुमार, कक्षा सात के हर्षित पाल (13) पुत्र सुनील पाल, कक्षा छह के मानस पाल (13) पुत्र सुरेश सिंह व कक्षा दो के रितेश पाल (7) पुत्र सुनील कुमार घायल होकर वैन में फंस गए।
चीख पुकार मचने पर आसपास खेतों में काम कर रहे किसान दौड़कर मौके पर पहुंचे और घायल बच्चों को बाहर निकाला। साथ ही चालक को भी पकड़ लिया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायल बच्चों को सीएचसी शिवली में भर्ती करवाया। वहां डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार के बाद छात्र अमन पाल, सीटू व उत्कर्ष की हालत नाजुक देखते हुए हैलट कानपुर रेफर कर दिया। जबकि शेष छह बच्चों को उपचार के बाद घर भेज दिया गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि गति अधिक होने के चलते वैन अनियंत्रित होकर पलटी है। शिवली थानाध्यक्ष प्रवीण कुमार यादव ने बताया कि घायल बच्चों का इलाज करवाया गया है। चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। मामले में तहरीर मिलने पर रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
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नियमों की अनदेखी, निजी वाहनों का प्रयोग
निजी स्कूलों में बच्चों को लाने और ले जाने के लिए प्रबंधन की ओर से अभिभावकों से मोटी रकम वसूली जा रही है, मगर सुविधा के नाम पर कोरम पूरा किया जा रहा है। जिम्मेदार भी इन वाहनों को देख कर अनदेखा कर देते हैं। वर्तमान समय में जिले में यातायात माह मनाया जा रहा है। जिसका प्रचार तो खूब दिख रहा है मगर सड़कों पर इसका अमल नहीं किया जा रहा है। स्कूल प्रबंधन की ओर से पीले रंग के स्कूल वाहन का प्रयोग करने की जगह निजी वाहन प्रयोग में लाए जा रहे हैं। इसमें बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई भी व्यवस्था नहीं होती है और न ही कोई परिवहन नियम का पालन किया जा रहा है। इन वाहनों के चालक क्षमता से अधिक बच्चों को वैन में बैठाकर परिवहन विभाग की ओर से तय की गई स्कूल वाहन की गति सीमा 40 किलोमीटर प्रति घंटा से दोगुनी रफ्तार से सड़कों पर फर्राटा भरते हैं। गुरुवार को बच्चों को स्कूल ले जाने के दौरान हादसाग्रस्त हुई वैन में स्कूल के नाम की जगह पर एके-47 असलहा के स्टीकर लगे मिले।
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स्कूल बस वैन का संचालन के लिए यह हैं नियम
- वाहन पीले रंग का हो, स्कूल का नाम लिखा हो।
- बसों में 02 एवं वैन में 01 अंकित हो।
- अग्निशमन यंत्र व फर्स्ट एड बाॅक्स भी हो।
- गति सीमा यंत्र (स्पीडो मी टर) लगा हो।
- नियमानुसार सीट बेल्ट का प्रावधान है।
- प्रेशर हाॅर्न, मल्टीटोन हाॅर्न न लगा हो।
- स्कूल बसों में आपातकालीन खिड़की, द्वार अवश्य हो।
- स्कूल बसों की खिड़की पर स्टील की छड़ क्षैतिज लगी हो।
- स्कूल बसों में सीट के नीचे स्कूल वैग रखने की जगह हो।
- बसों के प्रवेश द्वार पर हैंडरेल लगा हो।
- वाहन पर पुलिस, फायर, एंबुलेंस, हाॅस्पिटल, प्रबंधक, प्रधानाचार्य, चालक, परिचालक का नंबर अंकित होना अनिवार्य है।