यूपी के महोबा जिले में विकासखंड पनवाड़ी की ग्राम पंचायत फंदना में मनरेगा योजना के अंतर्गत पामारोजा (आयुर्वेदिक पौधे) की खेती कागजों पर दर्शाकर लाखों का बंदरबाट किए जाने मामला उजागर हुआ है। इस योजना के तहत चयनित 17 किसानों में से एक भी किसान के खेत में आज तक पौधे नहीं लगे। किसानों ने इसकी शिकायत जिलाधिकारी से करते हुए जांच कराकर कार्रवाई की मांग की है।
ग्राम पंचायत फंदना में 17 किसानों के खेतों में दर्शायी गई खेती
ग्राम पंचायत फंदना के किसान वृंदावन सिंह, हजारीलाल, इंद्रपाल सिंह, लखनलाल, राजकुमार समेत एक दर्जन किसानों ने डीएम को सौंपे शिकायती पत्र में बताया कि वर्ष 2017-18 में ग्राम पंचायत द्वारा 17 किसानों के खेतों में पामारोजा की खेती दर्शायी गई है जबकि इक्का दुक्का खेतों में ही कुछ पौधे लगाए गए है। इस योजना के तहत लघु व सीमांत किसानों को सौ प्रतिशत सब्सिडी पर लाभ दिया जाना था, लेकिन योजना में दो बड़े किसानों को भी लाभ दिया जाना दर्शाया गया है। डीजल, खाद, दवा, पौधे व मजदूरी मिलाकर प्रति किसान करीब ढाई लाख रुपये का कर्ज दिखाया गया, लेकिन खेतों में पौधे ही नहीं लगाए गए।
मौके पर नही लगे पेड़, किसानों ने डीएम से की शिकायत
शिकायती पत्र में आरोप लगाया कि प्रधान व सचिव ने योजना में लाखों रुपये का बंदरबाट किया है। सदाफल आयुर्वेद एजेंसी से फर्जी तरीके से भुगतान भी करा लिया गया है। किसानों ने जिलाधिकारी से मामले की जांच कराकर दोषियाें के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उधर, बीडीओ पनवाड़ी प्रद्युम्न नारायण द्विवेदी का कहना है कि इस योजना के तहत पहली किस्त के रूप में पेमेंट हुआ है। मौके पर जांच की गई है। कुछ किसानों ने उर्द और मूंग की फसल बोने के लिए पामारोजा की फसल पलट दी और खरीफ फसल बो दी है। पूरे मामले की जांच कराई जा रही है।
किस काम आती है रोजा घास
पामारोजा का तेल बड़े पैमाने पर इत्र, सौंदर्य प्रसाधन, और स्वादिष्ट बनाने का मसाला में प्रयोग किया जाता है। एंटीसेप्टिक, मच्छर से बचाने वाली क्रीम और दर्द तेल के गुणों से राहत में यह बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाताहै। दवा में यह लूम्बेगो, सख्त जोड़ और त्वचा रोगों के लिए एक उपाय के रूप में प्रयोग किया जाता है।
कैसे होती है पामारोजा की खेती
जलवायु एवं मृदा :
उष्ण कटिबंधीय, गर्म, आर्द्र क्षेत्रों में 900 की ऊंचाई तक मैदानों-1000 मीटर के विकास के लिए अनुकूल हैं | रेतीली दोमट मिट्टी जिसका पी.एच.मान 7.0-8.5 के मध्य हो उपयुक्त रहती है। उचित जल निकास वाली मृदायें जिसका पीएच मान 7.5-9तक हो मिट्टी पर अच्छी पैदावार की जा सकती है |
पामारोजा उगाने के लिए खेत की तैयारी :
मानसून की शुरुआत होने से पहले खेत अच्छी तरह से तैयार किया जाता है। खेत को 2-3 बार जोता जाता है एवं सभी खूंटी और घास की जड़ों को हटा देना चाहिए| आखिरी जुताई के समय, सड़ी हुई गोबर की खाद 10 टन/हेक्टेयर मिट्टी में डालना चाहिए|
प्रवर्धन एवं पौध रोपण:
पामारोजा बीज के माध्यम से प्रचारित किया जा सकता है| बीज को रेत के साथ मिला कर 15-20 सेमी की दूरी पर नर्सरी की जाती है तथा नर्सरी को लगातार पानी छिड़काव के द्वारा नम रखा जाता है| बीज द्वारा, रोपण विधि से एक हेक्टेयर के लिए 2.5 किलो बीज की आवश्यकता होता है, नर्सरी का सर्वोत्तम समय अप्रैल-मई होता है। पौध 4 सप्ताह के बाद रोपाई के लिए तैयार हो जाती हैं|
रोपण दूरी एवं रोपण समय
सामान्य दशाओं में 60 × 60 सेंटीमीटर की दुरी पर लगते है| असिंचित अवस्था में 30 × 30 सेंटी मीटर की दुरी पर लगते है| पामारोजा की रोपाई मानसून के आगमन (जून से अंत अगस्त) तक कर देनी चाहिए|
खाद एवं उर्वरक
10 टन/ हे. सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट को बोनेे से पहले देना चाहिए । पामारोजा में 100 : 50 : 50 किलोग्राम नाइट्रोजन, फास्फोरसव पोटाश की अवश्यकता प्रति हे./वर्ष पड़ती हैं। लगभग 40 किलो /हे. नाइट्रोजन की मात्रा प्रत्येक फसल काटने के बाद तीन भाग में देना चाहिये | जिंक सल्फेट 25 किलो/हे. डालने पर उपज में वृद्धि होती है |