कानपुर नगर निगम में मुर्दों के नाम पर भी घोटाला किया गया। अफसरों, कर्मियों और ठेकेदार की मिलीभगत से निगम के दो विद्घुत शवदाह गृहों में टिक्टियां खरीदे बिना ही भुगतान लिया जा रहा है। और तो और मरम्मत के नाम पर भी घोटाला हो रहा था। हर साल करीब 75 हजार का घोटाला किया गया है। ऐसा कई सालों से चल रहा है।
नगर निगम के भैरोघाट विद्घुत शवदाह गृह में हर साल करीब 300 और भगवतदास घाट विद्घुत शवदाह गृह में करीब 150 अज्ञात शवों का अंतिम संस्कार किया जाता है। नियमानुसार इन शवों को विद्घुत शवदाह गृह में बांसों की टिक्टी बनाकर ट्राली से अंतिम संस्कार रूम तक पहुंचाया जाता है, जहां तिख्ती सहित शव राख में तब्दील होता है।
पुलिस अज्ञात शवों को चादर में लपेटकर विद्घुत शवदाह गृह ले जाती है, जबकि ज्ञात शवों को परिजन तिख्ती पर रखकर ही लाते हैं। दोनों विद्घुत शवदाह गृहों का संचालन करने वाला नगर निगम का मार्ग प्रकाश विभाग अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार के लिए टिक्टियां खरीदता है।
डेमो पिक
नगर निगम के रिकार्ड के अनुसार, 167 रुपये प्रति तिख्ती की दर से इन्हें खरीदा जाता है। एक साल में करीब साढ़े चार सौ तिख्तियां खरीदी जाती हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि नगर निगम तिख्तियां खरीदता ही नहीं है, बल्कि भैरोघाट में अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले शवों की गंगा किनारे फेंकी जाने वाली टिक्टियां पंडों की मदद से विद्घुत शवदाह गृह के कर्मी ले जाते और उनमें ही अज्ञात शव रखकर अंतिम संस्कार किया जाता है।
इस तरह से करीब हर साल 75 हजार का घोटाला किया गया है। ऐसा कई सालों से चल रहा था। इस कार्य में विद्घुत शवदाह गृह में तैनात एक स्विचमैन की अहम भूमिका है। तिख्तियों का टेंडर कराने से लेकर ठेकेदार से फर्जी बिल भी वही बनवाता और उनसे बिल में लिखी गई रकम में से 80 प्रतिशत घूस लेकर चेक जारी करवाता रहा है। इस कार्य में लगे एक ठेकेदार ने भी इसकी पुष्टि की है।
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कर्मचारी की पत्नी के नाम से फर्म
भाजपा पार्षद दल के उपनेता महेंद्र शुक्ल दद्दा ने नगर आयुक्त से टिक्टियां और विद्घुत शवदाह गृह की मरम्मत के नाम पर घोटाले की जांच के लिए नगर आयुक्त संतोष कुमार शर्मा को पत्र लिखा है। उनके अनुसार, मार्ग प्रकाश विभाग के पूर्व मुख्य अभियंता रामनगीना त्रिपाठी के कार्यकाल में 2015 से 2017 तक ठेकेदार से एक- एक लाख से लेकर 10 - 10 लाख तक के पुर्जे विद्घुत शवदाह गृह की मरम्मत के नाम पर खरीदे गए। 80 प्रतिशत कार्यों में सप्लाई दिए बिना ही भुगतान कर दिया गया। यह फर्म भी इसी विद्घुत शवदाह गृह में तैनात रहे कर्मचारी की पत्नी के नाम से संचालित हो रही है।
- 300 अज्ञात शवों का हर साल दाहसंस्कार होता है भैरोघाट विद्घुत शवदाह गृह में
- 150 अज्ञात शवों का हर साल दाहसंस्कार होता है भगवतदास घाट शवदाह गृह में
- 167 रुपये प्रति टिक्टी की दर से खरीदता है नगर निगम का मार्ग प्रकाश विभाग
- 450 टिक्टियां हर साल विभाग के कागजों में खरीदी जाती हैं हर साल
वर्जन
मामला गंभीर है। अपर नगर आयुक्त द्वितीय अरविंद राय को इसकी जांच के आदेश दिए हैं। एक हफ्ते में जांच रिपोर्ट तलब की है। इसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल भैरोघाट विद्घुत शवदाह गृह में वर्षों से तैनात स्विचमैन कमरुद्दीन का तबादला जोन-3 में कर दिया है। उसका वेतन भी कटेगा। वहां ड्यूटी से गायब दो अन्य कर्मियों ओमप्रकाश और सादिक का एक- एक माह का वेतन काटने के निर्देश दिए हैं।
-संतोष कुमार शर्मा, नगर आयुक्त