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सरकार अब कैसे होगी कदमताल! सिलाई खुलते ही जूतों में हुए खेल की खुल गई पोल

Sun, 15 Apr 2018 03:57 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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फटा जूता दिखाता छात्र - फोटो : अमर उजाला
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कमीशनबाजी ने बच्चों के हक पर डाका डाल दिया? या जूते कमजोर थे? कुछ इन्ही सवालों के बीच यूपी के फर्रूखाबाद जिले का ये किस्सा। कान्वेंट स्कूलों के साथ कदमताल करने के लिए सूबे की सरकार ने परिषदीय स्कूलों के बच्चों के लिए निशुल्क जूता, मोजा, बैग और यूनिफार्म देने का फैसला किया था। योजना पर अमल भी हुआ पर यहां भी कमीशनबाजी ने बच्चों के हक पर डाका डाल दिया।

 

बच्चों को घटिया जूते और बैग की आपूर्ति कर दी गई और नतीजा यह हुआ कि चार माह में ही बांट गए जूते, मोजे की हकीकत सामने आ गई। कई बच्चों के जूतों में छेद हो गया और मोजों की सिलाई खुल गई है। बच्चेे फटे जूते या चप्पलें पहन कर स्कूल जा रहे हैं। जूतों के साथ बच्चों के स्कूली बैग भी फट गए। बच्चे स्कूल में घर का बना बैक या फटे बैग में प्लास्टिक की थैली लगाकर स्कूल ला रहे है। 

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जिले में लगभग 1855 परिषदीय विद्यालय है। इसमें 1 लाख 69 हजार 243 बच्चों के लिए राज्य स्तर से निर्धारित कार्यदायी संस्थाओं ने जूते, मोजे और बैग की आपूर्ति जिले में की थी। गाजियाबाद से जूतों की आपूर्ति, कोलकाता से मोजे और लखनऊ से बैगों की आपूर्ति 2017 में हुई थी। जिले में जूते अक्तूबर, मोजे नंबर और बैग सितंबर माह में आए थे। इनकी गुणवत्ता सत्यापन और वितरण में करीब एक माह का समय लगा। जूता छोटा बड़ा होने के कारण बच्चों को पहनन में दिक्कत शुरू हुई। लेकिन सरकारी ओर से मुफ्त में मिलने के कारण बच्चों ने उनको पहनना शुरू किया।

 

खराब गुणवत्ता के कारण जूते, मोजे छह माह में ही दगा देने लगे, किसी में छेंद हो गया तो किसी का फटा, किसी की सिलाई खुलने लगी। अमृतपुर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय गांधी के छात्र प्रशांत, नरेंद्र व मंजेश कहना है कि जूते फटने लगे है। इस कारण वह कभी फटे जूते पहन कर स्कूल आते तो कभी चप्पल पहन कर आते है। इसी स्कूल की छात्रा मुस्कान, सोनी का बताया कि उनके मोजों में छेंद होने के कारण खराब हो गए है। प्राथमिक विद्यालय महमदपुर गढ़िया की छात्रा पिंकी ने बताया कि उनका जूता फट गया है। संध्या ने बताया कि मोजा खराब हो गया है। जो बैग मिला उसकी कुछ जगह सिलाई खुल गई और कुछ जगह से फट गया है। इस कारण पालीथीन बैग के अंदर लगा ली है, जिससे कापी किताबें रखकर स्कूल आती है। 

4.57 करोड़ हो गए खर्च
परिषदीय स्कूलों के बच्चों के लिए जूते-मोजे और स्कूली बैग में करीब 4.57 लाख रुपये का बजट आया था। जिसका भुगतान कर दिया गया। गाजियाबाद की फर्म पावरटेक इंफ्राटेक को जूता सप्लाई का 2.25 करोड़ रुपये भुगतान किया गया। कोलकाता की खादिम इंडस्ट्रीज फर्म को मोजे सप्लाई का 70 लाख रुपये और लखनऊ की फर्म को बैग सप्लाई के 1.59 लाख रुपये भुगतान किया गया। जूता प्रति बच्चा 135 रुपये, मोजा 21 रुपये 75 पैसा प्रति बच्चा और प्रति बैग 149 रुपये के हिसाब से खरीदा गया था। 

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चप्पल पहन कर आते स्कूल
सरकार की ओर से मिले जूते फट जाने के कारण कई बच्चों ने जूता पहनना बंद कर दिया है। उन्होंने जूतों को घर पर रख दिया और चप्पल पहन कर स्कूल आते है। छात्रों की माने तो आगे से जूता फटा होने के कारण चलते समय वह लड़खड़ा जाते है। इससे उनको गिरने का डर रहता है। इस कारण जूतो की जगह वह चप्पल पहन कर स्कूल आते है। 

शिक्षा निदेशक ने तलब की रिपोर्ट 
बेसिक शिक्षा निदेशक डा. सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से बच्चों को बांटे गए जूते-मोजे व बैग के फटने संबंधी मामले सामने आने पर रिपोर्ट मांगी है। शिक्षा निदेशक के आए आदेश में कहा गया कि जूता-मोजा और स्कूली बैग की 12 माह की वारंटी है। जितने बच्चों के जूता- मोजा और बैग फट गए है। उनकी सूची तैयार कर संख्या उपलब्ध कराई जाए। 


क्या कहते हैं जिम्मेदार
जूते-मोजे और स्कूल बैग की गुणवत्ता खराब होने का मामला सामने आया है। कई जगह से जूता-मोजा और स्कूली बैग फटने की शिकायतें आई हैं। शिक्षा निदेशक ने भी इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट आते ही शिक्षा निदेशक को भेज दी जाएगी। अनिल कुमार, बीएसए

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