फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सावन आज सेः भगवान शिव के गुस्से से बचने के लिए न करें ये काम

Sat, 28 Jul 2018 04:56 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
1 of 10
दूसरों का धन अपना बनाने की चाह रखना, पैसों की हेराफेरी करना और धन-संपत्ति लूटना भी पाप की श्रेणी में आता
आषाढ़ जाते-जाते भरपूर बारिश हुई, अब सावन की शुरुआत से बारिश होने की संभावना और बढ़ गई है। सावन भगवान शिव को समर्पित होता है, कहा जाता है यह महीना शिव को प्रसन्न करने के लिए सबसे अच्छा है।
शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव को त्रिदेव कहा गया है। शिवजी की कल्पना एक ऐसे देव के रूप में की जाती है जो कभी संहारक तो कभी पालक होते हैं। भस्म, नाग, मृग चर्म, रुद्राक्ष आदि भगवान शिव की वेष-भूषा व आभूषण हैं। इन्हें संहार का देव भी माना गया है। इसी तरीके से भगवान शिव के कुल 12 नाम प्रख्यात हैं। पूरे भारत में शिव भगवान के भक्तों की संख्या सबसे अधिक है।
पापों को भगवान शिव नहीं करते माफ, देते हैं कठोर दंड ...

1. भगवान शिव को ऐसे लोग बिल्कुल पसंद नहीं हैं, जो अपने रिश्ते में ईमानदारी नहीं रखते। खासतौर से किसी दूसरे की शादीशुदा जिंदगी को तोड़ने की कोशिश करने से भोलेनाथ नाराज होते हैं और इस पाप को माफ नहीं करते। दूसरे के पति या पत्नी पर बुरी नजर रखना या उसे पाने की इच्छा करना भी पाप की श्रेणी में आता है।
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 10
दूसरे के पति या पत्नी पर बुरी नजर रखना या उसे पाने की इच्छा करना भी पाप की श्रेणी में आता है
2. दूसरों का धन अपना बनाने की चाह रखना, पैसों की हेराफेरी करना और धन-संपत्ति लूटना भी पाप की श्रेणी में आता है। भगवान शिव के लिए यह अक्षम्य अपराध है.
 
विज्ञापन

3 of 10
भगवान शिव की नजरों में हर हाल में माफी ना देने योग्य पाप
3. किसी भोलेभाले और निरपराध इंसान को कष्ट देना, उसे नुकसान पहुंचाना या उसके लिए बाधाएं पैदा करने की योजना बनाना या ऐसी सोच रखना भगवान शिव की नजरों में हर हाल में माफी ना देने योग्य पाप है।
 

4 of 10
बुरी सोच रखने के कारण भी पाप के हकदार और दंड की श्रेणी में आ जाते हैं
4. कुछ लोग रास्ता भटक जाते हैं, पर सही निर्देश मिलने पर वापस सही रास्ते पर आ जाते हैं। लेकन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो सही सुझाव मिलने के बावजूद बुराई का साथ नहीं छोड़ते और बुरी राह को खुद चुनते हैं। ऐसे लोगों के पाप अक्षम्य होते हैं।
विज्ञापन

5 of 10
आपकी बोली अक्षम्य पापों का हकदार भी बना सकती है
5. शिव पुराण के अनुसार जिस प्रकार आप किसी का बुरा नहीं करने के बावजूद, उसके लिए बुरी सोच रखने के कारण भी पाप के हकदार और दंड की श्रेणी में आ जाते हैं। उसी प्रकार भले ही आपने अपने कार्य से किसी का बुरा ना किया हो, लेकिन आपकी बोली अक्षम्य पापों का हकदार भी बना सकती है।

आगे की स्लाइड में पढ़ें- शिव के क्रोध से बचना है तो कभी न करें ये पांच गलती...
 
विज्ञापन

6 of 10
डेमो पिक
6. शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पर कभी भी शंक से जल नहीं चढ़ाना चाहिए। कहा जाता है कि भगवान शिव ने शंखचूड़ नाम के असुर का वध किया था। शंख को उसी असुर का प्रतीक माना जाता है। इसलिए शिव जी की पूजा शंख से नहीं की जाती।


 
विज्ञापन

7 of 10
डेमो पिक
7. शिव पुराण के अनुसार जालंधर नाम के असुर को भगवान शिव ने मार गिराया था। जालंधर को एक वरदान मिला था कि उसे अपनी पत्नी की पवित्रता की वजह कोई हरा नहीं पाएगा। कहा जाता है कि जालंधर को मरने के लिए भगवान विष्णु ने जालंधर की पत्नी तुलसी की पवित्रता को भंग करना पड़ा। अपने पति की मौत से नाराज़ तुलसी ने भगवान शिव का बहिष्कार कर दिया था। इसलिए उनकी पूजा तुलसी से नहीं की जाती।

 

8 of 10
डेमो पिक
8. भगवान शिव को तिल या तिल से बनी कोई वस्तु नहीं चढ़ाई जाती। यह भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ मान जाता है, इसलिए इसे भगवान शिव को नहीं अर्पित किया जाता।

 

9 of 10
डेमो पिक
9. भगवान शिव को अक्षत के रूप में टूटे हुए चावल कभी नहीं चढ़ते। टूटे हुए चावल अपूर्ण और अशुद्ध होता है, इसलिए यह शिव जी को नहीं चढ़ाएं जाते।

 
विज्ञापन

10 of 10
डेमो पिक
10. शिव जी को कुमकुम भी नहीं चढ़ाना चाहिए। कुमकुम सौभाग्य का प्रतीक है, जबकि भगवान शिव वैरागी हैं।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें