मां उजियारी देवी मंदिर में की गई भव्य सजावट
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बैसाख मास की अमावस्या को सतुवाही अमावस्या के रूप में भी मनाया जाता है। सतुवाही अमावस्या को लेकर अनेक पौराणिक मान्यताएं हैं। इस दिन सत्तू दान, गंगा स्नान, ब्राह्मणों व कन्या भोज से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन गर्मी से राहत देने वाली चीजों को दान करने का भी विधान है। सतुवाही अमावस्या के दिन प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी कानपुर के नवाबगंज स्थित मां उजियारी देवी मंदिर में मेले व माता के जागरण का आयोजन किया गया। पुजारी आचार्य रजनीश शुक्ल ने बताया कि क्षेत्रवासी ही नहीं दूर-दूर से लोगों ने आकर प्रसाद गृहण किया और मां के जयकारे लगाए।
यहां लगने वाले मेले का इतिहास तो यहां के बुजुर्ग भी नहीं बता सकते। कहा जाता है कि यहां आयोजित होने वाला मेला 150 वर्ष से भी पुराना है। मां उजियारी देवी मंदिर में शीतला माता विराजमान हैं। शहर में मां शीतला के मंदिर गिने चुने ही हैं। वर्षों से मंदिर में माता के दर्शन को आ रहे भक्तों का मानना है कि यहां माता की प्रतिमा स्वयं प्रकट हुई थी। मां के भक्तों ने ही मंदिर को भव्यता प्रदान की है।
सतुवाही अमावस्या के दिन माता को फल, मिष्ठान और ड्राई फ्रूट्स का भोग लगाया गया। साथ ही मेला व माता के जागरण की शुरुआत कन्या भोज से की गई। उसके बाद विशाल भोज का आयोजन किया गया। रात में रंगा-रंग कार्यक्रमों के साथ माता के जागरण व भजन कीर्तन की शुरुआत हुई। कार्यक्रम में दीपू गौतम, लालजी गुप्ता, विमलेश, प्रियांशु यादव, विनय, मयंक, विकास गुप्ता आदि लोग उपस्थित रहे।