बाबा साहब के बाद सामाजिक स्वतंत्रता के लिए डॉ. हेडगेवार ने नागपुर से 1925 से आरएसएस की स्थापना करके सामाजिक समरसता और अपनेपन का भाव लाने का प्रयास शुरू किया था। महर्षि वाल्मीकि ने दुनिया को मनुष्य बनने का संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि रामायण महाकाव्य के जरिए वाल्मीकि ने श्रीराम के रूप का ऐसा चरित्र दुनिया के सामने रखा, जिसमें संवेदना, अपनापन, सेवा भावना के साथ कर्मशीलता और संस्कार भी हैं।हे।
वाल्मीकि समाज के लोगों को यह सब सीखना होगा। भागवत ने कहा कि वाल्मीकि जयंती राष्ट्रीय उत्सव है। रामायण के जरिए वाल्मीकि ने करुणा, दया भाव का जो उदाहरण सबके सामने प्रस्तुत किया, उसका अनुसरण सभी समाज के लोगों को करना चाहिए। इससे पहले भागवत ने नानाराव पार्क में स्थापित महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा पर माल्यार्पण श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. रतन लाल ने किया। इस मौके पर वरिष्ठ प्रचारक अनिल ओक, क्षेत्र प्रचारक अनिल, प्रांत प्रचारक श्री राम, सह प्रांत प्रचारक रमेश, प्रांत प्रचार प्रमुख डॉ. अनुपम, सह प्रांत कार्यवाह भवानी भीख, क्षेत्र संपर्क प्रमुख सुरेश व प्रांत सह व्यवस्था प्रमुख विकास के अलावा समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण, मेयर प्रमिला पांडेय, संजीव पाठक बॉबी, किशनलाल सुदर्शन, अरुण समुद्रे, दया कुमार, धीरज कुमार वाल्मीकि सहित अनेक लोग मौजूद रहे।