बांदा जनपद के चारों मौजूदा विधायक नई विधानसभा का मुंह नहीं देख पाएंगे। इन्हें इन्हीं के मतदाताओं ने नकार दिया है। हार का मजा चखने वाले इन विधायकों में कांग्रेस के दो और सपा व बसपा के एक-एक विधायक हैं। खास बात यह है कि सपा विधायक ने पिछले चुनाव से अबकी 10 हजार से ज्यादा वोट अधिक पाए। उसके बाद भी तीसरे नंबर पर आए। जबकि बसपा और कांग्रेस विधायक ने साढ़े सात हजार से लेकर 19 हजार वोट कम पाए।
पिछले वर्ष 2012 के चुनाव में बांदा सदर और तिंदवारी से कांग्रेस के विधायक चुने गए। नरैनी से बसपा और बबेरू से सपा विधायक हैं। चारों विधायकों ने एक बार फिर अपने-अपने दलों से भाग्य आजमाया। लेकिन उन्हें मुंह की खानी पड़ी। बांदा सदर सीट से कांग्रेस विधायक विवेक कुमार सिंह चौथी बार चुनाव लड़ रहे थे। वह तीन बार जीत चुके थे। पिछले चुनाव 2012 में उन्हें 49,270 वोट मिले थे। अबकी घटकर 31,920 वोट रह गए।यानी 17,350 वोट गंवाने पड़े।
कांग्रेस के दूसरे विधायक दलजीत सिंह तिंदवारी से पिछला चुनाव जीतकर विधायक बने थे। वह कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष भी हैं। पिछले चुनाव में उन्होंने मौजूदा सांसद (राज्यसभा) और सपा के दिग्गज नेता विशंभर प्रसाद निषाद को शिकस्त देकर 61,184 वोट लेकर जीत हासिल की थी। अबकी उन्हें मात्र 42,089 वोट मिले। यानी पिछले चुनाव के मुकाबले 19,095 वोटों से हाथ धोना पड़ा। कांग्रेस के यह दोनों विधायक सपा समर्थित गठबंधन से अबकी प्रत्याशी थे।
बसपा के दिग्गज नेता और मौजूदा विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष गयाचरण दिनकर को भी अबकी कांग्रेस और भाजपा के दो नए नवेले प्रत्याशियों ने चुनौती दी। नतीजे में दिनकर भी तीसरे स्थान पर रहे। पिछले चुनाव के मुकाबले उन्होंने अबकी 7,585 वोट गंवा दिए। लेकिन जनपद में सपा के इकलौते विधायक बबेरू क्षेत्र के विशंभर सिंह यादव की स्थिति उपरोक्त तीनों विधायकों से अलग रही। पिछले 2012 के चुनाव के मुकाबले यादव अबकी 10,109 वोट ज्यादा पाए। फिर भी वह हारकर तीसरे नंबर पर रहे।