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सैफई मेडिकल कॉलेज रैगिंग प्रकरण: उन छात्रों पर हुई कार्रवाई जो छुट्टी पर थे, हुआ एक और बड़ा खुलासा

Sat, 24 Aug 2019 10:29 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, इटावा
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सैफई मेडिकल कॉलेज में सिर मुंडवा कर कक्षा के लिए जाते जूनियर छात्र - फोटो : अमर उजाला
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इटावा के सैफई मेडिकल कॉलेज (मिनी पीजीआई) के रैगिंग मामले को शुरुआत से नकार कर उच्च स्तरीय दबाव में एकाएक एक्शन मोड अपनाने वाले कैंपस के जिम्मेदार आनन-फानन में फैसले लेने में भी चूक कर बैठे। दोषी मेडिकल छात्रों पर कार्रवाई करने के साथ-साथ छात्र कल्याण संकाय अध्यक्ष के पद से जिन डॉ. कल्बे जव्वाद को हटाया है, वह रैगिंग के दौरान छुट्टी पर थे। 
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कैंपस के जानकारों की मानें तो छात्र कल्याण संकाय अध्यक्ष का जिम्मा संभाल रहे डॉ. कल्बे जव्वाद 18 अगस्त की शाम छुट्टी लेकर लखनऊ गए थे। उन्हें 19 और 20 अगस्त को कन्नौज मेडिकल कॉलेज में परीक्षा लेनी थी। 19 अगस्त को वह लखनऊ से सीधे कन्नौज चले गए थे।

 
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रैगिंग का घटनाक्रम इसी बीच हुआ। वह 20 अगस्त की शाम कैंपस लौटे। उनकी अनुपस्थिति में छात्र कल्याण संकाय अध्यक्ष का प्रभार चीफ वार्डन उमेश पाल के पास था। उमेश मॉनीटरिंग सेल में भी हैं।डीएम और सीएम कार्यालय से रैगिंग मामले में सख्त तेवर अपनाए जाने पर कैंपस के जिम्मेदारों ने आनन-फानन एक्शन दर्शाने की कोशिश के बीच छुट्टी पर रहे छात्र कल्याण संकाय अध्यक्ष को ही पद से हटाने का एलान कर दिया।

इस बाबत पूछने पर डॉ. जव्वाद ने कहा कि एंटी रैगिंग कमेटी और एंटी रैगिंग स्क्वॉड ने मुझे रैगिंग की कोई शिकायत नहीं दीं। चीफ र्वाडन को भी रैगिंग की सूचना देनी चाहिए थी। कन्नौज से लौटने पर मुझे चर्चाओं से पता चला। अगर मुझ पर कार्रवाई कर रहे हैं तो चीफ वार्डन पर क्यों नहीं। अगर मुझे एंटी रैगिंग कमेटी का पुनर्गठन न करने पर हटाया है तो यह कमेटी गठित करने का अधिकार कुलपति के पास होता है। मैं अपना पक्ष कुलपति और अगली जांच कमेटी के समक्ष रखूंगा। 
 
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