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अधूरी कमेटी से हो रही थी मॉनिटरिंग

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इटावा। एमबीबीएस प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों की रैगिंग के कारण आंतरिक व्यवस्थाओं को लेकर सवालों के घेरे में आए सैफई मेडिकल कॉलेज (मिनी पीजीआई) में कैंपस का बेहतर प्रबंध और अनुशासन बनाने वाली कमेटियों के मामले में भी अनदेखी सामने आई है। पता चला है कि जिस मॉनिटरिंग कमेटी पर पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, उसके दो सदस्य काफी पहले नौकरी छोड़कर कैंपस से अलग हो चुके हैं। एमसीआई (मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया) के निर्देश के बाद भी कमेटियों के नवीनीकरण पर ध्यान नहीं दिया गया।
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जानकार बताते हैं कि रैगिंग रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के मुताबिक हर बड़े शैक्षिक परिसर में एंटी रैगिंग स्क्वॉड, एंटी रैगिंग समिति और मॉनिटरिंग समिति के गठन का प्रावधान है। सैफई मिनी पीजीआई की मॉनिटरिंग कमेटी में डॉ. कल्बे जव्वाद, डॉ. शिखा, डॉ. विश्राम और चीफ वार्डन उमेश पाल को शामिल किया गया था। मॉनिटरिंग कमेटी के दो सदस्य डॉ. शिखा और डॉ. विश्राम कई महीने पहले नौकरी छोड़कर जा चुके हैं। उनके स्थान पर किसी का चयन नहीं किया गया।
एमसीआई ने 28 जुलाई को सैफई मिनी पीजीआई को पत्र जारी कर कमेटियों व स्क्वॉड का नवीनीकरण करने के निर्देश दिए थे। नवीनीकरण के अनुसार सदस्यों के नाम भी मांगे थे। सैफई कैंपस प्रशासन को दो अगस्त को यह पत्र मिल गया था लेकिन नवीनीकरण प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो सकी।
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रैगिंग की घटना के बाद कुलपति के निर्देश पर करीब तीन दिन पहले रजिस्ट्रार ने आनन-फानन समितियों के नवीनीकरण का आदेश जारी किया। यह आदेश तत्कालीन छात्र कल्याण संकाय अध्यक्ष डॉ. कल्बे जव्वाद को दिया गया, लेकिन अगले ही दिन उन्हें इस पद से हटाने का निर्देश भी जारी हो गया।
इस बाबत पूछने पर पीआरओ अनिल पांडेय ने कहा कि कमेटियों के नवीनीकरण के लिए एमसीआई ने चार सप्ताह का समय दिया है। तय समय में नवीनीकरण कर लिया जाएगा। कमेटियों में कितने सदस्य होने चाहिए, इसकी संख्या तय नहीं है। संस्थान विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात और अपने विवेक के अनुसार संख्या तय कर सकते हैं।
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