'आशिक़ी', 'साजन', 'दिल', 'बागी', 'दीवाना' जैसी सुपरहिट फिल्मों के जादुई गीतकार। जिनके गानों ने 90s के दौर में जवां दिलों की धड़कनें बढ़ा दी थीं । ये वही दौर था जब कई सालों तक "शोले" के 'खून से लाल' बॉलीवुड मोहब्बत, चाहत, जुनून और दीवानगी के इंद्रधनुषी रंग से साफ होने लगा था। हर तरफ बस एक अजीब सी हवा हिन्दुस्तान के शहरों और गांवों में चल रही थी। इसी समय के रोमांटिक सॉन्ग बॉलीवुड में सबसे ज़्यादा हिट हुए और किशोर-रफी को चाहने वाले उदित नारायन, अलका याग्निक, अभिजीत और विनोद राठौर को भी पसन्द करने लगे। 90s के दौर में गीतकार समीर की "कलम का जादू" हर नौजवां के सिर चढ़कर बोल रहा था। यहां समीर ने साझा किये अपने अनुभव...
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सफरनामा- समीर अनजान के साथ
त ‘सफरनामा- समीर अनजान के साथ’ म्यूजिकल शो
मौका था कानपुर के रागेंद्र स्वरूप ऑडिटोरियम सिविल लाइंस में आयोजित ‘सफरनामा- समीर अनजान के साथ’ म्यूजिकल नाइट का। उजास सोशल एंड कल्चरल सोसाइटी और सिंघम फिल्म्स की ओर से कराए गए इस अनोखे प्रोग्राम में गीतकार समीर अपने बॉलीवुड करियर के दौरान हिट गानों को लिखने की पीछे की वजह और पहला ब्रेक मिलने की खुशी जाहिर करते हुए पुरानी यादों में खो गए। समीर ने प्रोग्राम की शुरुआत करते हुए सभी फैन्स को फ्रेंडशिप डे की बधाई देते हुए 'याराना' फिल्म का गाना ‘तेरे जैसा यार कहां, कहां ऐसा याराना’ अपनी आवाज में गुनगुनाया। इसके बाद इसी गाने को मुंबई से आए सिंगर जमाल खान ने गाकर दर्शकों का दिल जीत लिया। इसके बाद समीर के लिखे सुपरहिट गानों को जमाल और दिपांशी ने अपनी आवाज में गाकर संगीत की शाम गुलाबी कर दी। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि इनकम टैक्स अधिकारी डॉ. सौरभ आनंद, इश्कजादे और दावत-ए-इश्क फिल्मों के एक्टर रतन राठौर, समाजसेवी आईएम रोहतगी, विशाल मिश्रा, असलम खान, राघवेन्द्र दुबे रवि, पंकज श्रीवास्तव, प्रफुल्ल श्रीवास्तव, विक्रांत श्रीवास्तव का स्वागत ईवेन्ट ऑर्गनाइजर आभा द्विवेदी ने बुके देकर किया।
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सफरनामा- समीर अनजान के साथ
गिनीज बुक में समीर के लिए बनी नई कैटेगरी
गीतकार समीर अंजान का नाम हाल ही में गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया है। समीर को यह खिताब सबसे ज्यादा बॉलीवुड गाने लिखने के लिए दिया गया है। इस खिताब के साथ समीर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराने वाले दुनिया के पहले गीतकार बन गए हैं। समीर ने बताया कि वे पिछले 30 सालों से फिल्मों के लिए गाने लिख रहे हैं और उनकी लिस्ट में तमाम सुपर हिट सॉन्ग्स भी हैं। अपने इस फिल्मी करियर के सफर में वह 650 फिल्मों में कुल मिलाकर 4000 से ज्यादा गाने अब तक लिख चुके हैं।
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सफरनामा- समीर अनजान के साथ
समीर ने सबसे ज्यादा गाने लिखे
आजतक किसी और गीतकार ने यह आंकड़ा नहीं छुआ है। हालांकि गिनीज बुक में ऐसी कोई कैटेगरी नहीं है, लेकिन टीम जब मुंबई में रिसर्च कर रही थी तो यह बात सामने आई कि समीर ने सबसे ज्यादा गाने लिखे हैं, तब एक नई कैटेगरी बनाई गई और समीर को सम्मानित किया गया।
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सफरनामा- समीर अनजान के साथ
बैंक की नौकरी ठुकराकर पहुंचे थे मुंबई
शीतला प्रसाद पांडेय उर्फ समीर अनजान का जन्म 24 फरवरी 1958 को बनारस उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनके पिता अंजान फिल्म जगत के मशहूर गीतकार थे। बचपन से ही समीर का रुझान संगीत की ओर था। समीर ने अपनी शुरूआती पढ़ाई बनारस में ही पूरी की। इसके बाद उन्होंने बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी से मास्टर्स ऑफ कॉमर्स में मानक डिग्री की उपाधि ली। उनके परिवार की इच्छा थी, की वह एक बैंक अधिकारी बने, लेकिन संगीत में रुचि होने के कारण उन्होंने पाई नौकरी भी ठुकरा दी और किस्मत आजमाने मुंबई पहुंच गए। अपने अनुभव साझा करते हुए समीर ने बताया कि तीन सालों तक कड़ा संघर्ष किया।
‘मुझे नींद ना आय, मुझे चैन न आय, न जाने कहां दिल खो गया’
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काफी मेहनत करने के बाद 1983 में उन्हें बतौर गीतकार बेखबर फिल्म के लिये गीत लिखने का मौका मिला। इस बीच समीर को ‘इंसाफ कौन करेगा’, दो कैदी, ‘रखवाला’, बीबी हो तो ऐसी’ जैसी कई बड़े बजट की फिल्मों में काम करने का अवसर मिला, लेकिन इन फिल्मों की असफलता के कारण वह फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में नाकामयाब रहे। करीब10 सालों तक मुंबई में संघर्ष करने के बाद 1990 में आमिर खान-माधुरी दीक्षित अभिनीत फिल्म ‘दिल’ में अपने गीत ‘मुझे नींद ना आय, मुझे चैन न आय, न जाने कहां दिल खो गया’ की सफलता के बाद समीर गीतकार के रूप में अपनी पहचान बनाने में सफल हो गये। इसी साल उन्हें महेश भट्ट की फिल्म ‘आशिकी’ में भी गीत लिखने का मौका मिला। फिल्म ‘आशिकी’ में ‘सांसों की जरूरत है जैस’, ‘मैं दुनिया भूला दूंगा’ और ‘नजर के सामने जिगर के पास’ गीतों की सफलता के बाद समीर को कई अच्छी फिल्मों के प्रस्ताव मिलने शुरू हो गए।