देश में 500 और 1000 रुपए के नोट बंद होने के बाद अफवाहों का दौरा शुरू हुआ है। बड़े ताज्जुब की बात है कि लोग इन अफवाहों पर आंख मूंदे यकीन भी कर रहे हैं। व्यापक स्तर पर फैली अफवाह की इस महामारी की चपेट में आज पूरा देश आ चुका है। इन फर्जी खबरों को फैलाने में सबसे बड़ा हथियार 'सोशल मीडिया' साबित हुआ है। मंगलवार रात जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद मोदी ने 'नोट बंदी महाअभियान' शुरू किए जाने की घोषणा की, सोशल मीडिया पर अफवाहों की बॉम्बारडिंग चालू हो गई।
भाजपा प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मोर्य भी इसकी आंच से न बच सके। फोटोशॉप का सहारा लेकर एक फर्जी तस्वरी तैयार की गई, जिसमें दो हजार के नए नोटों की गड्डी लिए एक लड़की को दिखाया गया। उसे मोर्य की बेटी बताया गया है। जबकि हकीकत में उनकी कोई बेटी ही नहीं है।
इस तरीके की तमाम अफवाहें फैलाई जा रही हैं। अफरा-तफरी भरे इस माहोल में कुछ लोग अफवाहे फैलाकर गलत फायदा उठाना चाहते हैं। ऐसे में लोगों को सतर्कता बरतनी होगी। लेकिन साथ में यह भी सवाल उठना चाहिए की इन अफवाहों का असल जिम्मेदार कौन है। क्योंकि शासन भी इन अफवाहों के सामने लाचार साबित हो रहा है। लाख सख्ती के बावजूद पुलिस असल जिम्मेदारों के पकड़ने में नाकाम रहती है। ऐसी अफवाहों के चलते ही देश में कई लोग मारे जा चुके हैं। इनकी मौत के जिम्मेदार भी अफवाहें फैलाने वाले हैं।
अमर उजाला डॉटकॉम टीम ने इस सवाल को अपने फेसबुक पेज के 'लिखो दिल खोलकर' मंच पर रखा है और लोगों से पूछा है कि नोट बंदी के बाद इन अफवाहों का जिम्मेदार कौन है। इस पर कई लोगों ने अपने जवाब भेजें हैं। इन्हें हम खबर के साथ संलग्न कर अपने पाठकों के साथ साझा कर रहे हैं...
Manish Mishra
इसके लिए भाजपा अाैर संघ के नेता जिम्मेदार हैं। वह जानबूझकर भाेपाल फेक एंकाउंटर से लाेगाें का ध्यान हटाना चाहते हैं।
Rajneesh Upadhayay
ये सब सपा, बसपा अाैर कांग्रेस की मिलीभगत के चलते हाे रहा है। उनके नेता लाेग लगातार सरकार काे बदनाम करने की साजिश रच रहे हैं।
Abrar Alam Khan
नौटंकी का मतलब नहीं समझा प्लीज एक्सप्लेन
Rohit K Sharma
In our society we are educated people dnt belive in any rumor if any problem than dail 100 and confirmed about the rumor.our police controle solve this problem.
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