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उन्नाव: कंपोजिट ग्रांट में नियमों की अनदेखी पड़ी भारी, डीएम पर गिरी गाज

Sat, 22 Feb 2020 09:28 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
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उन्नाव के पूर्व डीएम देवेंद्र कुमार पांडेय - फोटो : अमर उजाला
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आईएएस देवेंद्र कुमार पांडेय को कंपोजिट ग्रांट में नियमों की अनदेखी भारी पड़ गई। जिलाधिकारी रहते उन्होंने कंपोजिट ग्रांट के रूप में मिली धनराशि के उपभोग में जमकर अनियमितता बरती। इसका खुलासा मंडलायुक्त की जांच में हुआ तो शासन ने उन्हें निलंबित कर दिया। उनके स्थान पर कन्नौज के जिलाधिकारी रवींद्र कुमार को जनपद का नया डीएम बनाया गया है। 
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देवेंद्र कुमार पांडेय ने 26 जून 2018 को उन्नाव जिलाधिकारी के रूप में कार्यभार संभाला था। 20 सितंबर 2018 को शासन से परिषदीय स्कूलों के रखरखाव, स्टेशनरी व खेलकूद सामग्री की खरीद के लिए शासन से 9.73 करोड़ की धनराशि कंपोजिट ग्रांट के रूप में भेजी गई थी। छात्र संख्या के आधार पर स्कूलों को धन आवंटित किया गया था।

इसमें फर्मों के माध्यम से स्कूल में भेजे गए कुर्सी मेज, टाट पट्टी, शिलापट, चाक, बाल्टी, एमडीएम के बर्तन व खेल किट में बड़े पैमाने पर घालमेल की बात सामने आई थी। जिस पर सपा एमएलसी सुनील सिंह साजन ने मुख्यमंत्री और राज्यपाल से शिकायत की थी। 25 सितंबर को राज्य परियोजना निदेशक बेसिक शिक्षा विजय किरन आनंद ने जांच के लिए अधिकारियों की टीम उन्नाव भेजी थी।
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अधिकारियों ने नवाबगंज ब्लाक के जंसार, बरुआ, बिछिया ब्लॉक के बशीरतगंज, सराय कटियान व हुसैन नगर, हसनगंज ब्लॉक के हाजीपुर बबरी, फतेहपुर चौरासी ब्लॉक के ईश्वरीखेड़ा, और मियागंज ब्लॉक के हैदराबाद परिषदीय स्कूल की जांच की थी। जांच में सामने आया कि ग्रांट को खर्च करने के लिए जिलास्तर पर मनमाने तरीके से दूसरी सूची बनाकर कई गुना महंगे दामों पर खरीददारी दर्शा शासकीय धन का गबन किया गया।

रिपोर्ट आने के बाद निदेशक के निर्देश पर 1 अक्तूबर 2019 को पूर्व बीएसए बीके शर्मा और जौनपुर जिले ओलेदगंजन चंदेल कांप्लेक्स स्थित मेसर्स मां वैष्णो एजेंसी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में जिलाधिकारी पर भी उंगली उठाई थी। मामले की जानकारी जब सपा एमएलसी सुनील सिंह साजन को हुई तो उन्होंने मोर्चा खोल दिया। बड़े अधिकारी पर कार्रवाई के लिए एमएलसी ने ट्वीट से शुरुआत की। 

एमएलसी ने सदन में उठाया सवाल तो कमिश्नर को सौंपी गई जांच
सपा एमएलसी सुनील साजन ने 14 फरवरी को विधानपरिषद में कंपोजिट ग्रांट में हुए घालेमल और जिलाधिकारी की भूमिका पर सवाल उठाया। बताया था कि स्कूलों को आपूर्ति किए गए सामान की कीमत बाजार से दोगुनी लगाई गई। तत्कालीन बीएसए व फर्म संचालक पर रिपोर्ट तो दर्ज करा दी गई लेकिन बड़े अफसर को अभयदान दे दिया गया।

 
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मामला विधान परिषद में उठने के बाद शासन कमिश्नर लखनऊ मंडल को जांच सौंपी थी। जांच में ग्रांट खर्च करने हुई गड़बड़ी का खुलासा हुआ। उन्होंने ही जांच में डीएम की ओर से लिए गए निर्णयों को त्रुटिपूर्ण पाया। इसपर शासन ने डीएम देवेंद्र कुमार पांडेय को निलंबित कर दिया। जिले में यह पहला मौका है जब किसी जिलाधिकारी को निलंबित किया गया है।
वहीं, एमएलसी सुनील साजन ने इस कार्रवाई को भ्रष्टाचार के  खिलाफ अपनी लड़ाई की जीत बताया है।


कमिश्नर ने यह दी रिपोर्ट
1-ग्रांट के लिए दी गई धनराशि के संबंध में लिया त्रुटिपूर्ण निर्णय
2-क्रियान्वयन व उपभोग में अनियमितता की
3-राज्य परियोजना कार्यालय से निर्गत कार्यों की सूची को अनाधिकृत रूप से अतिक्रमित करते हुए जिलास्तर पर नई सूची जारी की। अनुमोदित कार्यों को भी कम किया गया। 
4-जिलास्तर पर राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा निर्धारित अनिवार्य कार्यों की सूची में अन्य सामान्य कार्यों को जोड़ दिया। अनिवार्य कामों को हटा दिया। 
5-विभिन्न विद्यालयों में कंपोजिट ग्रांट से एक ही विशेष जौनपुर की फर्म से ही अधिकांश सामग्री क्रय की। रेट भी सामान्य बाजार भाव से ज्यादा पर किया। सामग्री की गुणवत्ता अधोमानक रही। फर्म जीएसटी के लिए पंजीकृत भी नहीं है।
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