रूरा ट्रेन हादसे में गंभीर रूप से घायल हुई सात साल की मासूम को भारतीय रेलवे ने मुआवजा देने से इंकार कर दिया है। आखिर ऐसा क्या हुआ जो इस मासूम की तकलीफ को रेलवे के अफसरों ने नजरअंदाज कर दिया...
मुआवजा नहीं दिया जाना नाइंसाफी!
रूरा रेल दुर्घटना की तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
श्रेया (07) की जान भले ही अब खतरे से बाहर है लेकिन उसे रेलवे की ओर से मुआवजा नहीं दिया जाना उसके साथ नाइंसाफी ही नजर आता है। हां, रेलवे बोर्ड के एडवाइजर (हेल्थ) डॉ. गजेंद्र ने श्रेया का पूरा इलाज कराने का आश्वासन जरूर दिया है। लेकिन यहां सवाल उठता है कि मुआवजा देने से इंकार कर रेलवे कैसे बच्ची के इलाज के लिए तैयार हो गया...?
श्रेया के पिता उत्तम ने मुआवजे दिलाने की मांग की तो नहीं हुई सुनवाई
रूरा रेल दुर्घटना की तस्वीर
दरअसल, डॉ. गजेंद्र गुुरुवार को हैलट में घायलों का हालचाल लेने पहुंचे थे। तभी कोलकाता के बरसौरी (रीजेंट पार्क) मोहल्ले में रहने वाले श्रेया के पिता उत्तम ने मुआवजे दिलाने की मांग की लेकिन टिकट न होने की वजह से अधिकारी ने उन्हें साफ मना कर दिया।
उत्तम ने अपना और पत्नी का तो टिकट लिया था लेकिन बेटी का टिकट...
रूरा रेल दुर्घटना की तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
उत्तम ने अपना और पत्नी का तो टिकट लिया था लेकिन बेटी का टिकट उनके पास नहीं था। नियमों का कायदा तो यह कहता है कि पांच से 10 साल तक के बच्चे का हाफ टिकट लगता है। ज्ञात हो रेलवे हादसे में मामूली रूप से घायलों को 25 हजार और गंभीर रूप से घायलों को 50 हजार रुपये मुआवजा दे रहा है।