सैफई। उप्र आयुर्विज्ञान विवि के अस्थि रोग विभाग व ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन ने तृतीय सैफई आर्थ्रोप्लास्टी अपडेट 2025 का आयोजन किया गया। एक दिवसीय संगोष्ठी में जोड़ प्रत्यारोपण की अत्याधुनिक तकनीकों, नवीनतम शोध कार्यों और सर्जिकल कौशल पर गहन विचार-विमर्श हुआ। संगोष्ठी में देशभर से सौ से अधिक ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ व 25 से अधिक प्रतिष्ठित जोड़ प्रत्यारोपण विशेषज्ञों ने भाग लिया।
शनिवार को आयोजित संगोष्ठी का शुभारंभ कुलपति प्रो. डॉ पीके जैन ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। पहलगाम आतंकी हमले में शहीद हुए पर्यटकों को श्रद्धांजलि स्वरूप दो मिनट का मौन रखा गया। उन्होंने कहा कि रोबोटिक सर्जरी व प्रत्यारोपण प्रशिक्षण विश्वविद्यालय के लिए भविष्य में एक मील का पत्थर साबित होगा। इससे आधुनिक तकनीकों से लैस होकर आम जनता को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा सकेंगी। एम्स दिल्ली के पूर्व प्रोफेसर डॉ. बीसी रॉय व प्रो. डॉ सीएस यादव ने कहा कि सैफई जैसे क्षेत्र में रोबोटिक जोड़ प्रत्यारोपण तकनीकों का विकास गर्व का विषय है।
उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि जब भी संस्थान में रोबोटिक घुटना व कुल्हा प्रत्यारोपण सर्जरी होगी, वह स्वयं सहयोग प्रदान करेंगे। आयोजन अध्यक्ष एवं अस्थि रोग विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. सुनील कुमार ने कहा कि यह आयोजन विभाग की शैक्षणिक, शोध एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में बढ़ती उपलब्धियों का प्रमाण है। विभाग में उच्चस्तरीय चिकित्सक व संसाधन उपलब्ध हैं, जिससे न्यूनतम खर्च पर प्रतिदिन घुटना व कूल्हा प्रत्यारोपण सर्जरी की जा रही है। अब मरीजों को बड़े शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं रह गई है।
सैफई ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. आरएस यादव ने कहा कि यह संगोष्ठी सैफई को ऑर्थोपेडिक शिक्षा और तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी केंद्र के रूप में स्थापित कर रही है। इससे चिकित्सा नवाचार ग्रामीण अंचल तक पहुंच रहा है। राष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान डॉ. सीएस यादज्की ओर से द्वारा क्रूशिएट रिटेनिंग तकनीक से घुटना प्रत्यारोपण की लाइव सर्जरी, डॉ. अश्वनी मैचंद ने कुल्हा प्रत्यारोपण की लाइव सर्जरी व डॉ. निखिल वलसंगकर ने रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण की वीडियो से कई महत्वपूर्ण जानकारी दी। इस अवसर पर प्रति कुलपति प्रो. डॉ रमाकांत, संकायाध्यक्ष प्रो. डॉ आदेश कुमार सहित विश्वविद्यालय के कई विभागाध्यक्ष एवं संकाय सदस्य भी उपस्थित रहे।